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डॉक्टर ने बच्चे के जन्म के 20 मिनट बाद कहा- नही रहा वो, फिर मां ने बच्चे को दी कंगारू केयर टेक्निक और फिर

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आपने सुना होगा कि मां की ममता बच्चे के लिए किसी भी चीज से लड़ सकती हैं. मां की ममता में वो ताकत होती है जो यमराज को भी हरा सकती है. ऐसा ही मामला कुछ साल पहले ऑस्ट्रेलिया में हुआ था. दरअसल यहां पर एक महिला ने प्रीमेच्योर बच्चे को जन्म दिया जिसे डॉक्टर ने 20 मिनट बाद मृत घोषित कर दिया. डॉक्टरों ने मृत बच्चे को उसकी मां को दे दिया. लेकिन इस मां ने 2 घंटे तक अपने बच्चे को सीने से लगाए रखा और कंगारू केयर टेक्निक का इस्तेमाल करते हुए बच्चे को फिर से जिंदा कर दिया. आइए जानते हैं पूरी……

प्रीमैच्योर हुआ था बच्चा

ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में रहने वाली डेविड की पत्नी केट ऑग ने साल 2010 में एक बेटे को जन्म दिया. ऑग ने 3 घंटे के लेबर पेन सहने के बाद जिस बच्चे को जन्म दिया वह प्रीमेच्योर था. यह बच्चा करीब 6 महीने का था जिस कारण जन्म के वक्त इसका वजन औसत वजन से 1 किलो कम था और इसकी सेहत भी बेहद कमजोर थी. जन्म के वक्त ही बच्चे की हालत नाजुक थी. डॉक्टरों ने काफी प्रयास किए लेकिन 20 मिनट बाद उस बच्चे की मौत हो गई. मौत के बाद डॉक्टरों ने शव उसकी मां को दे दिया और स्किन टू स्किन केयर देने को कहा.

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शुरू हो गई धड़कन

महिला ने इस बच्चे का नाम जैमी रखा. जब जैमी की उम्र 5 महीने की हो गई थी तो इस महिला ने एक इंटरव्यू में बताया कि डॉक्टर ने जब उसे जेमी का शव ला कर दिया तो उसने सबसे पहले गाउन और फिर उसका ब्लैंकेट हटाया. हालाँकि डॉक्टर जैमी को मृत घोषित कर चुके थे लेकिन वो लगातार उससे बातें कर रही थी और सीने से लगा कर उसे थपथपा रही थी. इसी दौरान महिला ने प्यार से जेमी को अंगुली से अपना दूध पिलाया. तो अचानक जैमी ने ना केवल दूध पिया बल्कि उसकी धडकन भी चलने लगी थी. जेमी ने इसके थोड़े वक्त बाद अपनी आंखें खोल दी और गर्दन भी इधर-उधर घुमाने लगा. यह सब देख डॉक्टर भी चौंक गए. इस इंटरवयू में अपनी पत्नी के बारे में पति डेविड ने कहा कि आज जैमि के जिंदा होने का श्रेय उनकी पत्नी को जाता है. पत्नी की हिम्मत और समझदारी से ही आज जैमि जिंदा है. अगर ये उस दिन ऐसा नहीं करती तो जैमि शायद हमारे साथ नहीं होता.

इस टेक्निक से बचा ली जान

कंगारू केयर टेक्निक में कंगारू की पद्धति इस्तेमाल की जाती है. आमतौर पर जब बच्चा प्रीमेच्योर और गंभीर हालत में पैदा होता है तो डॉक्टर उसे आईसीयू में भेज देते हैं. लेकिन सिडनी हॉस्पिटल के डॉक्टर इससे ज्यादा कंगारू केयर टेक्निक पर विश्वास करते हैं. इस टेक्निक में कहा जाता है की जिस तरह कंगारू की मां अपने बच्चे को थैली में रखती है, जिससे वो गर्म रहने के साथ साथ माँ के टच के कारण एक्टिव भी राहत है. इसी तरह अगर इंसान मैं भी नवजात शिशु की मां बच्चे को अपने टच में रखती है तो इससे उसका शरीर हाईटेक इन्क्यूबेटर के मुकाबले ज्यादा गर्म रहता है. इस विधि से बच्चे की जान बचाई जा सकती है.

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