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एक गांव में दो भाई रहते थे, बड़े वाले भाई की शादी हो गई थी और उसका एक बेटा था, छोटा भाई अभी तक कुंवारा था, दोनों भाई मिलजुल कर खेती करते थे, एक दिन उन दोनों ने फसल काटी, इस काम को

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एक गांव में दो भाई रहा करते थे। बड़े भाई की शादी हो गई और उसका एक बेटा भी था। लेकिन छोटा भाई अभी तक कुंवारा था। दोनों भाई साझेदारी में खेती करते थे। जब फसल पककर तैयार हो गई तो एक दिन दोनों भाइयों ने फसल काटी। काम करते-करते दोनों को रात हो गई।

फसल को रात में घर पर ले जाना संभव नहीं था। इसी वजह से दोनों ने सोचा कि हम आज रात को खेत पर ही रुक जाते हैं। सुबह जब मजदूर आएंगे तो हम इस फसल को घर ले जाएंगे। रात में दोनों भाइयों को भूख लगने लगी। फिर दोनों भाइयों ने विचार किया कि हम एक-एक करके घर जाते हैं और खाना खाकर लौट आते हैं।

पहले बड़ा भाई खाना खाने के लिए घर चला गया और छोटा भाई खेत पर रुका। इस दौरान उसने सोचा कि बड़े भाई की पत्नी है, उसका एक बेटा भी है। उसे मुझसे ज्यादा अनाज चाहिए होगा, तो उसने ऐसा सोचकर अपने ढेर में से थोड़ा अनाज उठाकर भाई के ढेर में डाल दिया।

कुछ देर बाद बड़ा भाई घर से खाना खाकर लौट आया और उसने छोटे भाई को घर खाने के लिए भेज दिया। इस दौरान बड़े भाई ने विचार किया कि मेरा छोटा भाई अकेला है, जबकि मेरी पास मेरी पत्नी और बेटा है। लेकिन उसका ध्यान रखने वाला कोई नहीं है, उसने अपने ढेर में से थोड़ा-सा अनाज उठाकर छोटे भाई के ढेर में डाल दिया। दोनों भाइयों के ढेर में बराबर-बराबर अनाज हो गया। लेकिन दोनों का प्यार बढ़ गया।

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कथा की सीख

इस कहानी से यह सीखने को मिलता है कि जब परिवार के सदस्य एक-दूसरे के दुख-सुख के बारे में सोचते हैं तो उनके बीच हमेशा प्रेम बना रहता है। ऐसे लोगों के घरों में कभी झगड़े नहीं होते हैं।

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