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मोदी सरकार ने दिया किसानों को दिवाली तोहफा, इतने रुपए सस्ती की खाद

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केंद्र की मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल से इस बात के संकेत दे दिए थे कि इस बार मोदी सरकार का मुख्य फोकस किसानों को लेकर होगा और इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए अब सरकार के हस्तक्षेप के बाद खाद बनाने वाली देश की सबसे बड़ी सहकारी सोसाइटी IFFCO ने बड़ी घोषणा की है.

बता दें कि किसानों को DAP सहित सभी तरह की खाद पर बड़ी छूट दी जा रही है. दरअसल खाद की नई कीमतें 11 अक्टूबर से लागू हो गई है. बता दें कि IFFCO के प्रबंध निदेशक यू एस अवस्थी ने ये घोषणा की है. मोदी सरकार ने सब्सिडी बढ़ा दी है. किसानों को मिलने वाली इस सब्सिडी से केन्द्र सरकार पर करीब 22 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भार पड़ेगा.

अब ये होंगी DAP-NPK खाद की नई कीमतें

मालूम हो कि प्रबंध निदेशक यू एस अवस्थी ने घोषणा करते हुए यह कहा है कि अब डीएपी पर 50 रुपये प्रति किलो (बोरी) की छूट दी है. बता दें कि नई कीमत 1250 रुपये होगी. आपको याद दिला दें कि इससे पहले ये बोरी 1300 रुपये की कीमत पर मिलती थी.

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यही नहीं इसके अलावा एनपीके-1 कॉम्पलेक्स की कीमत अब 1250 रुपये से घटाकर 1200 रुपये कर दी गई है. वहीं दूसरी ओर एनपीके-2 की कीमत 1260 रुपये से घटाकर 1210 रुपये करने की घोषणा की गई है.

बता दें कि अगर एनपी कॉम्पलेक्स की बात करें तो इसकी नई कीमत 950 रुपये है. हालांकि इस सब के बीच नीम कोटेड यूरिया की कीमतों में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है.

दरअसल यह पुरानी रेट पर ही 266.50 रुपये प्रति 45 किलो बोरी के हिसाब से मिलता रहेगा.

जानें क्या है DAP और NPK खाद

क्या होता है डीएपी

आपको बता दें कि डीएपी का पूरा नाम डाइअमोनियम फॉस्फेट होता है. इस उर्वरक में आधे से ज्यादा मात्रा में फास्फोरस होता है. दरअसल इसका कुछ हिस्सा पानी में घुलनशील होता है जबकि कुछ हिस्सा मिट्टी में मिल जाता है.

मालूम हो कि डीएपी जमीन की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के साथ-साथ उसे भुरभुरा भी बनाता है जो कि जड़ों को फैलने में मदद करता है. दरअसल जब जड़ मजबूत होता है तो फसलों में ज्यादा फल लगता है.

क्या है एनपीके

आपको बता दें कि एनपीके उर्वरक में नाइट्रोजन फॉस्फोरस और पोटैशिम मिला होता है. दरअसल इस उर्वरक का काम होता है पौधे (डंठल) और फलों को मजबूत करना. इस उर्रवरक के प्रयोग से फलों के गिरने की समस्या कम हो जाती है.

मालूम हो कि दोनों उर्वरक दानेदार होते हैं इस कारण इसका प्रयोग फसलों की बुआई के समय ही किया जाता है जिससे कि पौधों की तना मजबूत हो और जड़ें जमीन में ज्यादा से ज्यादा फैल सके.

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