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कब और कैसे रंग बदलता है गिरगिट, जानिए गिरगिट से जुड़े कुछ ऐसे ही मजेदार और रोचक तथ्य

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यह कहावत तो सुनी होगी “गिरगिट की तरह रंग बदलना”। दरअसल ,यह कहावत इसलिए कहीं जाती है क्योंकि हर पशु पक्षी का अपना एक रंग होता है। लेकिन गिरगिट एकमात्र ऐसा जीव होता है। जिसके शरीर का कोई कलर नहीं होता है गिरगिट अपने आसपास के माहौल के हिसाब से अपना रंग बदल लेता है। त्वचा का रंग बदलने के मामले में गिरगिट का कोई मुकाबला नहीं।

लंबे समय से माना जाता रहा है कि सांप जैसे शिकारियों से बचने के लिए वे ऐसा करते हैं। लेकिन असल में अपनी अलग अलग भावनाओं जैसे आक्रामकता, गुस्सा, दूसरे गिरगिटों को अपना मूड दिखाने और इस माध्यम से संवाद करने के लिए भी वे रंग बदलते हैं। आज हम आपको बताएंगे इसकी गिरगिट कब क्यों और कैसे है अपने आपको तरह-तरह के रंगों में बदल लेता है।

तापमान के अनुसार अपने शरीर को एड्रेस करने के लिए

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आपको बता दे कि ठंड में रहने वाला गिरगिट ज्यादा गर्मी लेने के लिए अपना रंग गहरा कर लेता है। जबकि गर्मी में रहने वाला गिरगिट ठंडा के लिए अपने शरीर का रंग हल्का कर लेता है।

मूड के बारे में बताता है गिरगिट का रंग बदलना
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब गिरगिट गुस्से में होता है, तो उसके शरीर का रंग गहरा होता है और जब गिरगिट शांत होता है, तो उसके शरीर का रंग हल्का हो जाता है।

शायद आपको मालूम नहीं होगा पर गिरगिट में एक विशेष प्रकार की सेल्स क्रोमैटोफोर्स पाई जाती है, जो कि उसकी मस्तिष्क द्वारा नियंत्रित की जाती है। गिरगिट को जब ख़तरा का अंदेशा होता है। तो वह तुरंत अपने मस्तिष्क को संदेश भेज देता है। जिसके अनुसार ये सेल्स फैलने या फिर सिकुड़ने लगते हैं और अपना आकार बदल कर छोटे- बड़े भी हो जाती है। ऐसा करने से गिरगिट का रंग बदलने लगता है। गिरगिट अपने शरीर को कई प्रकार के रंग दे सकता है। जैसे पीला, गहरा भूरा, काला, सफेद और कई अन्य तरह के रंगों में ढाल सकता है।

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