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आपको भी मालामाल बना सकती है छोटी सेविंग्स, बस आप अपना लीजिए ये तरीके

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जब भी बात स्टॉक मार्केट में निवेश की आती है तो आम आदमी तो थोड़ा हिचकिचा जरूर जाता है क्योंकि इसमें रिस्क काफी माना जाता है लेकिन अगर आप सोच समझ कर निवेश करें तो आपको नुकसान का सामना नहीं करना पड़ेगा.

दरअसल इसका बकायदा एक तरीका है जिसके बारे में कई बार आप अपने दोस्तों या परिचितों से सुना होगा. दरअसल हम बात कर रहे हैं SIP की. हालांकि ये SIP है क्या? और इसके फायदे क्या हैं जिसकी वजह से यह निवेशकों के बीच इतना पॉपुलर हो चुका है. इस सब के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं. तो चलिए जानते हैं एसआईपी के बारे में सबकुछ..

जानिए क्या है SIP

आपको बता दें कि SIP यानी कि सिस्‍टमेटिक इन्‍वेस्‍टमेंट प्‍लान दरअसल इक्विटी म्‍यूचुअल फंड्स में निवेश करने का सबसे बेहतरीन तरीका है. बता दें कि इसमें आप हर महीने 500 रुपए के छोटे निवेश से भी शुरुआत कर सकते हैं. दरअसल, सिप के जरिए म्‍यूचुअल फंड की यूनिट्स का खरीद वैल्यू ऐवरेज हो जाती है.

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मालूम हो कि इससे लॉन्ग टर्म में आपको बेहतर रिटर्न मिलने उम्मीद रहती है. दरअसल सिप के जरिए निवेश करने से बाजार के उतार-चढ़ाव से जुड़ा जोखिम काफी कम होता है. आपको बता दें कि जब बाजार में तेजी होती है तो आपको कम यूनिट अलॉट किए जाते हैं और जब बाजार में गिरावट आती है तो आपके निवेश की उतनी ही रकम में ज्‍यादा यूनिट मिल जाती हैं.

ये हैं एसआईपी के फायदे

नियमित निवेश की पड़ती है आदत

बता दें कि यदि आपने पहले ही यह तय कर लिया है कि महीने की 10 तारीख को किसी फंड में निवेश किया जाएगा तो ऐसे में सिप की मदद से आपको नियमित निवेश की आदत पड़ जाती है. दरअसल अगर आप सैलरीड हैं और हर महीने कुछ हजार रुपए ही बचा पाते हैं, तो सिप आपके लिए बेहतरीन रणनीति है. बता दें कि हर महीने कुछ हजार रुपए आपके खाते से कटते जाते हैं और लंबी अवधि में इससे अच्छी-खासी पूंजी इकट्ठी हो जाती है.

ऐवरेज वैल्यू में होता है निवेश

मालूम हो कि अगर किसी समय किसी म्यूचुअल फंड का Nav ज्यादा होता है तो उस समय आपको निवेश पर कम यूनिट्स मिलेंगी, हालांकि अगर उस समय फंड का एनएवी कम हो तो उतनी ही राशि में ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं. दरअसल इस तरह सिप की मदद से आपका निवेश औसत भाव पर होता जाता है.

मिलता है कंपाउंडिंग का फायदा

आपको बता दें कि सिप का सबसे बेहतरीन पहलू यह होता है कि इससे कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है, यानि आपको हर महीने मिलने वाले रिटर्न पर भी रिटर्न मिलता रहता है. दरअसल इसकी वजह से आपकी पूंजी काफी तेजी से बढ़ती है. उदाहरण के लिए अगर आप हर महीने 2,000 रुपए किसी एमएफ स्कीम में लगाएं और उस पर आपको 12 % सालाना की दर से रिटर्न मिले, तो 15 सालों बाद आपको उससे 9,51,863 रुपए मिलेंगे.

अपने फाइनेंशियल टारगेट से जोड़ें सिप

मालूम हो कि सिप को आप अपने फाइनेंशियल टारगेट्स से जोड़ सकते हैं, जी हां, जैसे मकान खरीदना, बच्चों की पढ़ाई के लिए फंड जुटाना, रिटायरमेंट के बाद के लिए पैसे जुटाना. मालूम हो कि हर चीज का टारगेट तय करें और फिर कितने फंड चाहिए इसका अंदाजा लगाएं.

इसके बाद फिर उस हिसाब से निवेश तय होना चाहिए. बता दें कि जब आपका लक्ष्य तय होगा, तभी आप उसके लिए अच्छी एसेट कॉम्बिनेशन चुन सकते हैं. ऐसे में आपको यह भी पता होगा कि आपको हर महीने कितनी बचत करनी है.

वक्त के हिसाब से तय करें निवेश विकल्प

बता दें कि आपकी एसेट मिक्स तय करना उस बात पर भी निर्भर करेगा कि आपके पास उस लक्ष्य को पाने के लिए कितना वक्त है. जी हां, दरअसल अगर आपके पास ज्यादा वक्त है तो आप इक्विटी में ज्यादा और डेट में कम एक्सपोजर करते हुए अपनी प्लानिंग बना सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादा वक्त आपको ज्यादा जोखिम उठाने की क्षमता देता है. हालांकि यदि आपके पास समय कम है, तो ऐसे में बेहतर यही है कि आप डेट ऑप्शन पर अधिक फोकस करें.

हर साल बढ़ाएं सिप अमाउंट

बता दें कि अगर आपको ऐसा लगता है कि आपके बच्चे के विवाह पर 10 लाख रुपए का खर्च आएगा और आप अब से 15 साल बाद उसकी शादी करने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आपको 30 लाख रुपए इस काम के लिए जुटाने होंगे.

जी हां, दरअसल अब मान लीजिए कि महंगाई 8% सालाना की दर से बढ़ती रहेगी और 15 साल में 30 लाख रुपए चाहिए तो आपको हर महीने तकरीबन 6500 रुपए बचाने होंगे. वहीं अगर उस पर 12 % की दर से रिटर्न मिले . पहले कम अमाउंट से शुरू करें और बाद में थोड़ा-थोड़ा करके अमाउंट बढ़ाते रहें. बता दें कि हर साल आमदनी बढ़ने के साथ सिप का अमाउंट भी बढ़ाएं तो इससे आपका फायदा होगा.

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