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इस परिवार ने पेश की हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल, जानकर होगी खुशी

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हमारे देश में इस समय हिंदू-मुस्लिम के नाम पर राजनीति हो रही है, जिस वजह से लोगों के बीच एक-दूसरे के प्रति हीन भावना उत्पन्न होने लगी है. लेकिन समाज का एक ऐसा हिस्सा भी है, जहां हिंदू-मुस्लिम एकता के दर्शन हुए. यहां कुछ ऐसा देखने को मिला जिससे पता चलता है कि जात-पात हमारे देशवासियों के बीच फूट नहीं डाल सकती. उत्तर प्रदेश के भदोही के एक मुस्लिम परिवार द्वारा कुछ ऐसा किया गया जिससे हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिली.

दरअसल, इस परिवार ने अपनी फर्म के कर्मचारी मुरारी लाल श्रीवास्तव की मृत्यु पर पूरे हिंदू रीति-रिवाजों के साथ उनका दाह संस्कार किया. इतना ही नहीं उनकी तेरहवीं की रस्म भी अदा की. 13वीं के लिए छपे कार्ड में नीचे शोकाकुल परिवार में इरफान अहमद खान और फरीद खान का नाम छपा था. वहीं भवदीय में उनकी फर्म का नाम लिखा हुआ था.

13वीं के लिए भोज में इरफान और फरीद ने मुरालीलाल की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की. उन्होंने मुरारी लाल की 13वीं पर हरिरामपुर में बड़ा भोज आयोजित किया, जहां हिंदू-मुस्लिम समुदाय के हजारों लोग पहुंचे. बता दें कि मुरारी लाल की उम्र 65 साल थी और 13 जून को उनका निधन हो गया. मुरारीलाल को खेत में किसी जहरीले जानवर ने काट लिया, जिसके बाद इलाज के दौरान 13 जून को उनका निधन हो गया. उनके परिवार में कोई भी नहीं था. इसी वजह से इरफान के परिवार को उनका शव सौंप दिया गया.

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इरफान ने मुरारी का अंतिम क्रियाकर्म करवाया. इरफान और फरीद के मुताबिक, हमारे साथ मुरारी पिछले 15 सालों से जुड़े हुए थे और वे हमारे घरवालों की तरह थे. वे हमारे घर के सबसे बुजुर्ग सदस्य थे. उन्होंने यह भी कहा कि जब हम तेरहवीं के कार्ड बांटने गए तो लोग हमें आश्चर्य से देख रहे थे. बता दें कि इरफान के परिवार वालों ने ब्राह्मण भोज से पहले सिर मुडवाने की रस्म पूरी की.

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