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चाणक्य ने आखिर क्यों कहा कि जरूरत से ज्यादा ईमानदार होना होता है ज्यादा खतरनाक

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वैसे तो ईमानदार और सीधे व्यक्ति को सबसे अच्छा माना जाता है। लेकिन कई बार आपने सुना होगा कि ज्यादा ईमानदार होना भी बुरा साबित हो जाता है। जी हां आपको बता दें कि चाणक्य ने अपने एक नियम के अनुसार, इस बात को उदाहरण देकर समझाया है। चाणक्य कहते हैं कि जैसे वह पेड़ जो देखने में मजबूत और सीधा होता है तो उसे ही सबसे पहले काटा जाता है। क्योंकि उसे काटने में किसी भी तरह की कोई कठिनाई नहीं होती है। उसी प्रकार मनुष्य का स्वभाव होता है। जो मनुष्य सबसे ज्यादा सीधा और सरल होता है। उसे ही जिंदगी में सबसे ज्यादा कठिन झेलनी पड़ती हैं। तो आइए आज हम आपको इस आर्टिकल में बताते हैं चाणक्य के कुछ ऐसी ही महत्वपूर्ण नीतियों के बारे में।

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चाणक्य कहते हैं कि हर तरह की दोस्ती के पीछे कोई ना कोई स्वार्थ जरूर होता है। दुनिया में ऐसा कोई भी दोस्त नहीं होता। जिसके पीछे लोगों का स्वार्थ ना छुपा हो।

यदि कोई सांप जहरीला नहीं है तो उसे फुफकारना नहीं छोड़ना चाहिए। इसी तरह यदि कोई व्यक्ति कमजोर है तो उसे खुद को ताकत पर प्रदर्शित करना चाहिए।

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सच्चा मित्र हमेशा वही होता है। जो आपके कठिन समय मैं आपके साथ खड़ा हो।

हम लोगों को कभी भी किसी से अपनी राज की बातों को नहीं कहना चाहिए। यह आदत हमें बर्बाद कर सकती है। आचार्य चाणक्य ने भी इस बात को कहा है कि जब हम अपने दिल की बात किसी के साथ बांट लेते हैं तो वह राज नहीं जाती । जिसके बाद यह बात आग की तरह पूरे शहर गांव में फैल जाती है।

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