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भारत के इस रहस्यमयी में किले में दबा हुआ है गहरा राज, रात में यहां पर जाना खतरे से खाली नही

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भारत में कई ऐसे रहस्यमयी किले हैं जो दिखते तो बहुत सुंदर है. लेकिन इनके अंदर कई ऐसे राज छुपे हुए हैं, जिनको कोई नहीं जानता. ऐसा ही एक किला बुंदेलखंड प्रांत में है, जिसका नाम कालिंजर का किला है. आपको बता दें कि बुंदेलखंड प्रांत उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों में बंटा हुआ है. बुंदेलखंड के कुछ जिले उत्तर प्रदेश में तो कुछ जिले मध्यप्रदेश में पड़ते हैं. लेकिन कालिंजर यूपी के बांदा जिले में है.

कालिंजर का किला भारत का सबसे विशाल और अपराजेय दुर्ग माना जाता है. यह दुर्ग प्राचीन काल में शक्तिचंदेल साम्राज्य के अधीन था. कालिंजर पर महमूद गजनवी, कुतुबुद्दीन ऐबक, शेरशाह सूरी और हुमायूं जैसे कई योद्धाओं ने आक्रमण किया. लेकिन कोई भी विजय हासिल नहीं कर सका. लेकिन बाद में मुगल बादशाह अकबर ने इस पर अपना अधिकार कर लिया और किले को बीरबल को तोहफे में दे दिया.

इस किले में आपको कई प्राचीन मंदिर मिल जाएंगे, जो गुप्त काल के हैं. इस किले में एक शिव मंदिर है, जिसके बारे में यह मान्यता है कि भगवान शंकर ने सागर मंथन से निकला विष पीने के बाद यही तपस्या की थी. यहां का नीलकंठ मंदिर सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसका निर्माण नागों ने कराया था. इस मंदिर में एक शिवलिंग स्थापित है, जो बहुत पुरानी है.

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नीलकंड मंदिर के ऊपर जल का एक प्राकृतिक स्रोत है, जो कभी नहीं सूखता. इस जल से शिवलिंग का लगातार अभिषेक होता रहता है. वैसे बुंदेलखंड का यह क्षेत्र सूखे के लिए जाना जाता है. लेकिन यह जल स्रोत कभी नहीं सूखता. इस किले में कई रहस्यमई गुफाएं भी है. यह गुफाएं शुरू तो किले से होती है, लेकिन कहां खत्म होती है यह किसी को नहीं पता.

यह किला जमीन से 800 फीट ऊंचाई पर बना है. रात होते ही यहां अजीबोगरीब घटनाएं होती है. लोग ऐसा कहते हैं कि रात में यहां मौजूद रानी महल से घुंघरू की आवाज सुनाई देती है. यहां लोग घूमने आते हैं, लेकिन रात होने से पहले ही चले जाते हैं. इस किले में प्रवेश के लिए सात द्वार है और सभी दरवाजे एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है. यह स्तंभ और दीवारों में कई प्रतिलिपियां बनी हुई है, जहां खजाने का रहस्य छुपा है, जिसे अभी तक कोई नहीं ढूंढ पाया.

इसके किले सीता सेज नाम की एक छोटी सी गुफा है जहां एक पत्थर पर एक पलंग और तकिया रखा हुआ है. ऐसा माना जाता है कि यहां माता सीता की विश्राम स्थली थी. यहां एक कुंड है जिसे सीता कुंड के नाम से जाना जाता है. इसके अलावा यहां बुड्ढा और बुड्ढी नाम के दो ताल है जिसका जल औषधि गुणों से भरपूर है. यहां स्नान करने से कुष्ठ रोग दूर हो जाते हैं.

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