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डेंगू के महंगे इलाज के खर्च से बचने के आप ले सकते हैं डेंगू कवर पॉलिसी, आएगी आपके बहुत काम

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मानसून का मौसम चल रहा है ऐसे में खासतौर पर इस मौसम में काफी बदलाव हमें देखने को मिलते हैं और हमारी वनस्पतियों और वातावरण पर इस मौसम में काफी प्रभाव पड़ता है क्योंकि मानसून अपने साथ बीमारियों का जोखिम भी लेकर आता है।

दरअसल हर वर्ष मानसून के बाद डेंगू फैलने लगता है। डेंगू का खतरा बड़ा है और लोग इससे बचने के लिये सभी प्रकार के उपाय करते हैं। यही कारण है कि दवाइयों के मामले में कई बड़े आविष्कार किए गए हैं और विश्व-स्तरीय स्वास्थ्य रक्षा सुविधाएं तैयार की गई हैं।

लेकिन इस बीमारी के इलाज पर काफी ज्यादा खर्च आता है इसलिए आप डेंगू केयर पॉलिसी भी ले सकते हैं जोकि आपके बेहद काम आएगी। चलिए जानते हैं इसके बारे में..

सर्वप्रथम जांच कराएं

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जानकारी के लिए बता दें कि डेंगू का पता लगाने के लिए खून की महंगी जांच करानी पड़ती हैं और इसका इलाज भी महंगा है, जिसमें दवा और इंजेक्शन शामिल हैं। यही कारण है कि डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए एक विशेष डेंगू-हेल्थ कवर आवश्यक है, जो इस बीमारी के लिए लोगों का बीमा करेगा।

डेंगू कवर भी है आवश्यक

यह तो आपने भी सुना होगा कि इन रोगों से बचने का एक उपाय है और वो है आस-पास के क्षेत्र को स्वच्छ रखना और आवश्यकतानुसार मच्छरदानी का उपयोग करना। लेकिन आपको बता दें कि इसके लिए एक बीमा पॉलिसी भी बेहद जरूरी है।

यही कारण है कि खासतौर पर मानसून में आपके और आपके परिवार के स्वास्थ्य की सुरक्षा करने वाली डेंगू केयर पॉलिसी लेना उचित होगा, जिसमें इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन, प्री-हॉस्पिटलाइजेशन और पोस्ट-हॉस्पिटलाइजेशन शामिल हो।

यहां हम आपको बता दें कि कई बीमा कंपनियों ने डेंगू बीमारी को कवर देने के लिए अलग से हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी देते हैं। जी हां, दरअसल आप 49 से 682 रुपए के मामूली प्रीमियम में 10 हजार से एक लाख रुपए तक का कवर ले सकते हैं।

पॉलिसी लेते समय इन बातों का रखें विशेष ख्याल

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी लेते समय लोग अक्सर पूरे परिवार के लिए कवरेज, बीमित राशि और प्रीमियम, पहले से मौजूद बीमारियों के कवर के लिए कम प्रतीक्षा अवधि, नेटवर्क हॉस्पिटल, नगद रहित सुविधा, प्री-पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन, कमरे का किराया, आदि जैसे प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान देते हैं।

दरअसल साधारणतः लोग ऐसा प्लान लेते हैं, जिसमें ये सभी पहलू हों। डेंगू केयर पॉलिसी में भी ये सभी लाभ मिल सकते हैं। यही कारण है कि डेंगू केयर पॉलिसी लेते समय ग्राहक को निम्नलिखित लाभों पर ध्यान देना चाहिए।

वहन करने की योग्यता

मालूम हो कि यह ‘धन को महत्व’ देने वाली स्वास्थ्य बीमा योजना होनी चाहिए, जो डेंगू के उपचार पर केंद्रित हो और किफायती प्रीमियम दरों पर हॉस्पिटलाइजेशन और आउटपेशेंट ट्रीटमेंट को कवर करे।

ओपीडी कवरेज

इसमे पॉलिसी में जांच, परामर्श, होम नर्सिंग और फार्मेसी के लिए कवरेज होना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि अधिकांश मामलों में डेंगू का उपचार घर पर ही किया जाता है।

यह है खरीदारी की सरल प्रक्रिया

आपको बता दें कि डेंगू पॉलिसी सरल होनी चाहिए। इसके साथ ही ग्राहक को एकल प्रीमियम का भुगतान करना चाहिए, चाहे उसकी आयु कितनी भी हो। बता दें कि पॉलिसी में जटिल अंडर राइटिंग नहीं होनी चाहिए, इसमें मेडिकल टेस्ट के लिए कोई पूर्व आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।

इसके अलावा कम प्रतीक्षा अवधि रिटेल पॉलिसी के लिए प्रतीक्षा अवधि बहुत कम होनी चाहिए, अन्य अधिकांश क्षतिपूर्ति योजनाओं की तुलना में 15 दिन।

रिजेक्शन नहीं होना चाहिए

मालूम हो कि डेंगू केयर पॉलिसी सभी प्रकार के लोगों के लिए उपलब्ध होनी चाहिए और उनके लिए भी, जिन्हें सामान्य स्वास्थ्य बीमा योजना से रिजेक्ट कर दिया गया है।

गैर-मेडिकल खर्चों के लिए कवरेज

आपको बता दें कि इस पॉलिसी में गैर-मेडिकल खर्च भी कवर होने चाहिए, जैसे हॉस्पिटलाइजेशन के दौरान साझा आवास के विकल्प वगैरह।

इस बीमारी के इलाज पर आता है इतना खर्च

आपको बता दें कि रुपए मेट्रो शहरों में डेंगू के इलाज पर औसत खर्च 50 हजार से एक लाख तक आता है

वहीं छोटे शहरों में 25 हजार रुपए से 75 रुपए तक का खर्च आता है

एक आंकड़े के अनुसार भारत में 2013 के मुकाबले 2017 में 250% बढ़े हैं डेंगू के मरीज

जानिए क्या हैं डेंगू के लक्षण

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि डेंगू एडीज मच्छरों के काटने से होता है। जी हां, दरअसल इस रोग में तेज बुखार के साथ शरीर पर लाल-लाल चकत्ते दिखाई देते है।

आपको बता दें कि इसमें 104 डिग्री तेज बुखार आता है और सिर में तेज दर्द होता है।

यही नहीं, इसमें शरीर के साथ जोड़ों में भी दर्द होता है। साथ ही खाना पचाने में भी दिक्कत होती है।

मालूम हो कि उल्टी होना, भूख कम लगना व ब्लड प्रेशर कम हो जाना इसके कुछ अन्य लक्षण हैं।

इसके अलावा चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना और बॉडी में प्लेटलेट्स की कमी हो जाना भी इस बीमारी के खास लक्षण हैं।

बता दें कि इसमें लीवर और सीने में फ्लूइड जमा हो जाता है।

ये है डेंगू से जुड़ी आवश्यक जानकारी

आपको बता दें कि डेंगू का मच्छर साधारणतः दिन में काटता है।

मालूम हो कि गर्मी और बारिश के मौसम में यह बीमारी तेजी से पनपती है।

इसके अलावा आपको बता दें कि डेंगू के मच्छर हमेशा साफ़ पानी में पनपते हैं जैसे छत पर लगी पानी की टंकी, घड़ों और बाल्टियों में जमा पीने का पानी, कूलर का पानी, गमलों में भरा पानी, आदि।

डेंगू से बचने के ये हैं घरेलू उपाय

डेंगू का इलाज वैसे तो डॉक्टर ही करते हैं लेकिन डेंगू न हो इस संबंध में आप पहले से सावधानी के तौर पर कुछ तरीके अपना सकते हैं, जैसे:

जो भी रोगी है उसको ज्यादा से ज्यादा तरल चीजें दीजिए ताकि उसके शरीर में पानी की कमी न हो। इसके अलावा आपको बता दें कि डेंगू में गिलोई के पत्ते काफी उपयोगी होते हैं।

आप मरीज को पपीते के पत्ते पानी में पीस कर दे सकते हैं। दरअसल आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह शरीर में प्लेटलेट्स बढाने का काम करते हैं हालांकि एक बार डॉक्टर की सलाह जरुर लें।

खास ध्यान रखें कि मरीज को डिस्प्रिन और एस्प्रीन की गोली कभी ना दें।

हालांकि चाहें तो बुखार कम करने के लिए पेरासिटामॉल की गोली दी जा सकती है।

इसके अलावा जितना हो सके नारियल पानी और जूस पिलाएं।

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