Loading...

अब क्रिप्टोकरेंसी खरीदने या बेचने पर हो सकती है 10 साल की जेल या लग सकता है 25 करोड़ का जुर्माना

0 11

क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित एक बड़ी खबर आई है. जी हां, दरअसल अब भारत में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ा हर काम अपराध कहलाएगा. बता दें कि क्रिप्टोकरेंसी बेचने-खरीदने या रखने से लेकर इससे जुड़ी किसी भी प्रकार की गतिविधि में लिप्त पाए जाने पर जेल जाना पड़ेगा. सिर्फ इतना ही नहीं, बिटकॉइन रखने, बेचने या खरीदने वालों को अब 25 करोड़ रुपये जुर्माना लग सकता है.

जी हां, दरअसल आपको बता दें कि पिछले हफ्ते वर्चुअल क्रिप्टोकरेंसी पर बने एक उच्चस्तरीय सरकारी पैनल ने भारत में सभी वर्चुअल क्रिप्टोकरेंसीज पर बैन लगाने का सुझाव दिया था.

मालूम हो कि इस पैनल ने 23 जुलाई 2019 को क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध और नियमन आधिकारिक डिजिटल करेंसी विधेयक 2019 यानी कि Banning of Cryptocurrency and Regulation of Official Digital Currency Bill, 2019 नाम से एक ड्राफ्ट बिल भी प्रस्तावित किया था.

10 साल की जेल एवं 25 करोड़ जुर्माना का है प्रावधान

Loading...

आपको बता दें कि अंग्रेजी बिज़नेस वेबसाइट मिंट की एक खबर के मुताबिक, इस पैनल की ओर से प्रस्तावित बिल में वर्चुअल करेंसी से किसी भी तरह की डीलिंग रखने पर, चाहे वह कोई व्यक्ति हो या कंपनी, 25 करोड़ का जुर्माना और साथ ही 10 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान भी किया गया है.

ऑफिशियल डिजिटल करेंसी लॉन्च करने के पक्ष में है पैनल

वैसे तो इस पैनल ने क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पेश किया है लेकिन यह पैनल एक ऑफिशियल डिजिटल करेंसी लॉन्च करने के पक्ष में भी है. जी हां, दरअसल इसमें कहा गया है कि चूंकि वर्चुअल करेंसी और इसकी टेक्नोलॉजी लगातार बढ़ रही है, ऐसे में सरकार एक स्टैंडिंग कमिटी का गठन कर सकती है, जो जरूरत पड़ने पर मुद्दे पर दोबारा विचार कर सके.

दरअसल आपको बता दें कि क्रिप्टोकरेंसी को लेकर भारत सरकार का रुख नकारात्मक रहा है. जी हां, आपको बता दें कि पिछले साल अप्रैल में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकों और फाइनेंशियल कंपनीज के क्रिप्टोकरंसी में डीलिंग करने पर रोक लगा दी थी.

अब ऐसा में अगर पैनल की ओर से प्रस्तावित इस बिल पर मुहर लग जाती है, तो भारत भी उन देशों की श्रेणी में आ जाएगा, जहां क्रिप्टोकरंसी पर बैन लगा हुआ है. मालूम हो कि भारत में क्रिप्टोकरंसी में डील कर रहे कई ट्रेडर्स पहले ही अपना असेट दूसरे देशों में ट्रांसफर कर रहे हैं. अब यह तो जाहिर है कि सरकार के इस मूव से स्टार्टअप्स, वेंचर कैपिटलिस्ट्स और एंजल इन्वेस्टर्स को तगड़ा झटका लगना तय है.

जानिए आखिर क्या है क्रिप्टोकरेंसी

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह करेंसी एक ऐसी करेंसी होती है जो कंप्यूटर एल्गोरिदम पर बेस्ड होती है. जी हां, दरअसल यह एक तरह की इंडिपेंडेंट करेंसी होती है, जिसका कोई मालिक नहीं होता. वहीं, यह करेंसी किसी भी ऑथोरिटी के काबू में नहीं होती यानी इसका संचालन किसी राज्य, देश या सरकार द्वारा नहीं किया जाता.

यही कारण है कि इसे डिजिटल करेंसी, वर्चुअल करेंसी, इंटरनेट करेंसी, ई-करेंसी और पीपुल्स करेंसी के नाम से भी जाना जाता है. आपको बता दें कि सबसे पहली क्रिप्टो करेंसी बिटकॉइन है, जिसे साल 2009 में जापान के सतोषी नाकमोतो नाम के इंजीनियर ने डेवलप किया था और ये देखते ही देखते बेहद पॉपुलर हो गई थी.

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.