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चाणक्य नीति: शत्रु के समान होती है ऐसी पत्नी, माता-पिता और संतान

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एक कहावत सबसे ज्यादा कहीं जाती है। कि अपना खून अपना ही होता है। लेकिन जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियां आ जाती है। जब अपने ही लोग शत्रु बन जाते हैं। महान राजनीति के चाणक्य ने अपनी नीतियों के बारे में बताया है। उन्होंने कहा है कि अपनों का कैसा व्यवहार हमारे लिए शत्रु के समान है। आपको बता दें कि चाणक्य ने कई सारी ऐसी नीतियां बताई है। जिनको अगर हम अपने जीवन में अपना लेते हैं तो हम कई सारी परेशानियों से निजात पा सकते हैं।

चाणक्य के मुताबिक, यदि किसी का पुत्र मुर्ख होता है। तो वह अपने माता-पिता के लिए एक शत्रु के समान होता है। ऐसी संतान जीवन भर अपने परिवार वालों को दुख के सिवा और कुछ नहीं देती है। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी बताया है कि ऐसी संतान 1000 मुर्ख संतान के बराबर होती है।

चाणक्य के मुताबिक, जो पिता कर्ज लेकर जीवन का गुजारा करता है। तो वह पिता भी एक शत्रु के समान होता है। एक पिता का फर्ज होता है कि वह अपने संतान के लिए अच्छे से पैसा कमाए। उसकी देखभाल करें और उसका पालन-पोषण करें।

यदि एक महिला ज्यादा रूपवती होती है। तो वह अपने पति के लिए एक समस्या खड़ी कर सकती है। यदि उसका पति कमजोर है और उसकी रक्षा करने में असमर्थ है। तो वह महिला अपने पति के लिए एक शत्रु के समान हो जाती है।

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