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मोदी सरकार देगी चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए सब्सिडी, अगले 1 साल में लगाए जाएंगे 1000 चार्जिंग स्टेशन

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एक तरफ दिन प्रतिदिन बढ़ती पेट्रोल/डीज़ल की कीमतें और दूसरी तरफ तेज़ी से बढ़ता प्रदूषण, ये दो ऐसे प्रमुख कारण हैं जिनकी वजह से इलेक्ट्रिक वाहन बाजार का काफी सुनहरा भविष्य खासतौर पर भारत में दिखलाई दे रहा है।

यही कारण है कि ऑटोमोबाइल सेक्टर तेजी से इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में बदल रहा है। दरअसल यह एक तरीका है जिससे इस नए युग में लोगों को महंगे तेल और प्रदूषण से मुक्ति मिल सकती है। आपको बता दें कि इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्ज करने के लिए लगातार अब नए-नए सेंटर खुल रहे हैं और चार्जिंग के लिए नई-नई तकनीकें ईजाद हो रही हैं।

इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार अब चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए सब्सिडी के तौर पर आर्थिक मदद भी देगी। बता दें कि यह मदद इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग स्टेशन से जुड़े उपकरणों की लागत पर निर्भर करेगी।

मालूम हो कि चार्जिंग स्टेशन लगाने में दिलचस्पी रखने वाले कारोबारी या कंपनी भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय से संपर्क कर सकते हैं। आपको बता दें कि पहले चरण में 1000 चार्जिंग स्टेशन लगाए जाएंगे। हर चार्जिंग स्टेशन पर 6 चार्जर होंगे।

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यानी कि 1000 स्टेशन पर 6000 गाड़ियों को एक बार में चार्ज किया जा सकेगा। इसका मतलब यह है कि इस प्रकार एक चार्जर से 24 घंटे में कम से कम 15 गाड़ियां चार्ज हो सकेंगी क्योंकि इन स्टेशन पर कई फास्ट चार्जर होंगे।

मालूम हो कि इच्छुक आवेदक 20 अगस्त तक सब्सिडी वाले चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए अप्लाई कर सकते हैं। मंत्रालय के अनुसार आवेदन की तारीख समाप्त होने के एक महीने के अंदर प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इसके बाद चयनित आवेदकों को चार्जिंग स्टेशन लगाने का काम पूरा करने के लिए 9 महीने का समय दिया जाएगा।

किसी निजी जमीन या सार्वजनिक जगहों पर लगा सकते हैं यह स्टेशन

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सबसे अधिक चार्जिंग स्टेशन 40 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों में लगाए जाएंगे। हालांकि 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले किसी भी शहर में चार्जिंग स्टेशन लगाए जा सकते हैं।

बता दें कि यह स्टेशन किसी निजी जमीन या सार्वजनिक जगहों पर लगा सकते हैं। इसके अलावा पब्लिक के लिए चार्जिंग स्टेशन लगाने वालों को ही सरकार से सब्सिडी मिलेगी। मालूम हो कि चार्जिंग स्टेशन लगाने वालों को ऑनलाइन सेवा भी देनी होगी। दरअसल ग्राहक ऑनलाइन बुकिंग के जरिए अपने वाहन के चार्जिंग के समय को बुक कर सकेंगे।

आपको बता दें कि चार्जिंग स्टेशन लगाने वाला व्यक्ति या कंपनी ओपन एक्सेस के तहत किसी भी बिजली वितरण कंपनी यानी कि डिस्कॉम से बिजली ले सकता है। मालूम हो कि बिजली कंपनियां चार्जिंग स्टेशन के लिए अपनी सप्लाई की लागत के मुकाबले 15% एक्स्ट्रा चार्ज कर सकेंगी।

मतलब यह कि अगर बिजली आपूर्ति की लागत 5 रुपए प्रति यूनिट है तो चार्जिंग स्टेशन को अधिकतम 6.5 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली की आपूर्ति होगी। बता दें कि चार्जिंग स्टेशन चालू करने के लिए ग्रीन सिगनल देने का काम दरअसल डिस्कॉम करेगी।

एक चार्जिंग स्टेशन पर होंगे 6 चार्जर और इनमें से 3 फास्ट चार्जर होंगे

आपको बता दें कि मंत्रालय की शर्तों के मुताबिक एक चार्जिंग स्टेशन पर 6 चार्जर होंगे और इनमें से कम से कम 3 फास्ट चार्जर होंगे। दरअसल ये आधे घंटे में आपके वाहन को चार्ज करने में सक्षम होंगे। बाकी के 3 थोड़े स्लो चार्जर होंगे। दरअसल चार्जिंग स्टेशन के 3 प्रकार होंगे।

आपको बता दें कि पहली श्रेणी में सार्वजनिक स्थान पर कमर्शियल इस्तेमाल के लिए लगने वाले चार्जिंग स्टेशन होंगे। वहीं दूसरी श्रेणी की बात करें तो इसमें मंत्रालय, सचिवालय, सरकारी अस्पताल व अन्य सरकारी भवनों में लगने वाले स्टेशन होंगे जो सिर्फ उस परिसर में आने जाने वाले वाहनों को चार्ज करने के लिए होंगे।

इसके अलावा तीसरी श्रेणी में गैर सार्वजनिक जगहों पर लगाए जाने वाले चार्जिंग स्टेशन होंगे जो पब्लिक के लिए कमर्शियल तरीके से उपलब्ध होंगे। दरअसल सरकार की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी इस बात पर निर्भर करेगी कि किस श्रेणी में चार्जिंग स्टेशन लगाया जा रहा है।

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