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मोदी सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड को लेकर किया बड़ा बदलाव, अब नहीं लगेंगे ये चार्ज, मिलेगा सबसे सस्ता लोन

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केंद्र की मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही यह जाहिर कर दिया है कि इस सरकार का मुख्य फोकस किसान पर रहेगा और इसी कड़ी में अब सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड यानी कि केसीसी बनवाने की प्रक्रिया को पहले से काफी आसान कर दिया है.

जी हां, दरअसल सरकार के निर्देश पर इंडियन बैंकर एसोसिएशन ने केसीसी बनाने की प्रोसेसिंग फीस, इंस्पेक्शन, लेजर फोलियो, रिनुअल फीस और नए केसीसी जारी करने के लिए सभी अन्य सर्विस चार्ज माफ कर दिए हैं. इस वजह से किसी भी किसान के लिए क्रेडिट कार्ड बनवाना पहले से बहुत आसान हो गया है.

मालूम हो कि केसीसी के लिए ये सारी फीस माफ करने की जानकारी केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने संसद में दी. बता दें कि सिर्फ इतना ही नहीं रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने रेहन मुक्त यानी कि collateral free कृषि कर्ज की लिमिट को भी 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.60 लाख रुपये कर दिया है.

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गांव में लगेगा केसीसी बनाने का कैंप

मालूम हो कि मोदी सरकार ने सभी राज्य सरकारों को बैंक-वार और गांव-वार शिविर आयोजित करने की सलाह दी है, ताकि जो भी पात्र किसान हैं उनको भटकना न पड़े. बता दें कि केसीसी आवेदन पत्र गांवों से लेकर संबंधित बैंक शाखा में जमा करना होगा. मालूम हो कि बैंकों को यह सलाह दी गई है कि वे आवेदन पूरा होने के 2 हफ्ते के अंदर केसीसी जारी करें. राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति इसकी निगरानी करेगी.

दरअसल साधारणतः जब किसान बैंक के पास केसीसी बनवाने के लिए जाता था तो बैंक उसे तमाम तरह की फीस में उलझा देते थे. दरअसल बैंक अधिकारी नहीं चाहते थे कि किसानों को पैसा मिले. लेकिन सरकार ने अब इन झंझटों से किसानों को मुक्त कर दिया है.

जी हां, अब आप बैंक जाइए तो अधिकारी को किसान क्रेडिट कार्ड बनाना ही पड़ेगा. मालूम हो कि अगर बैंक अधिकारी मना कर रहा है तो उस पर कार्रवाई हो सकती है. दरअसल सरकार चाहती है कि किसान साहूकारों से ज्यादा ब्याज दर पर लोन लेने की जगह बैंक से सबसे सस्ती दर पर क्रेडिट कार्ड के जरिए लोन हासिल करे. बता दें कि खेती के लिए 3 लाख रुपये तक का कर्ज मिलता है.

इन कागजातों की पड़ेगी आवश्यकता

आपको बता दें कि इसके लिए गांवों में जो कैंप लगाए जाएंगे उनमें किसान से पहचान पत्र और निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, जमीन का रिकॉर्ड और फोटो देनी होगी. दरअसल इतने में ही बैंक को केसीसी बनाना पड़ेगा.

एक आंकड़े के अनुसार देश में इस समय 14.5 करोड़ किसान परिवार हैं, जबकि केसीसी सिर्फ 6.92 करोड़ किसानों के पास ही हैं. मालूम हो कि मोदी सरकार ने इसे बनवाने की प्रक्रिया अब पहले से काफी तेज कर दी है. आपको बता दें कि केसीसी की शुरुआत साल 1998 में हुई थी और तब इसके नियम इतने जटिल थे कि किसान बनवाने से कतराता था.

हालांकि अब गांवों में किसान मित्र किसानों की सिफारिश कर रहे हैं कि वे बैंक जाकर केसीसी बनवाएं. बता दें कि जिला स्तर पर डिस्ट्रिक्ट लीड बैंक मैनेजर इसके लिए जवाबदेह है और राज्य स्तर पर राज्य की बैंकिंग एसोसिएशन.

यही नहीं, इसके अलावा पशुपालन और मछलीपालन के लिए भी सरकार चाहती है कि खेती-किसानी से जुड़े ज्यादा से ज्यादा लोग केसीसी बनवाएं. मालूम हो कि इसके लिए इसकी कवरेज बढ़ाकर पशुपालन और मछलीपालन के लिए भी कर दी गई है. जानकारी के लिए बता दें कि पशुपालन और मछलीपालन के लिए 2 लाख रुपये का लोन मिलता है.

मिलता है सबसे सस्ता लोन

आपको बता दें खेती-किसानी के लिए ब्याज दर वैसे तो 9% है. लेकिन सरकार इसमें 2 % की सब्सिडी भी देती है. तो इस प्रकार यह 7 % पड़ता है. हालांकि समय पर लौटा दें तो इस पर 3 % और छूट मिल जाती है. दरअसल इस तरह इसकी दर ईमानदार किसानों के लिए मात्र 4 % रह जाती है. आपको बता दें कि कोई भी साहूकार इतनी सस्ती दर पर किसी को कर्ज नहीं दे सकता.

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