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इन 3 कारणों की वजह से महिलाओं को श्मशान घाट जाने से किया जाता है मना

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प्रकृति का एक कड़वा नियम है की जिसने भी जन्म दिया है उसे 1 दिन मरना ही होगा. व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके परिजनो द्वारा उसका अंतिम संस्कार किया जाता है. आपने देखा होगा की शव यात्रा में परिवार के सदस्यों में केवल पुरुष ही जाते हैं, जबकि महिलाएं श्मशान घाट में नहीं आ सकती. इसके पीछे कई कारण है. आइये जानते है इस मामले पर उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित मनीष शर्मा की राय…

1. नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव -: शास्त्र के अनुसार श्मशान घाट में नकारात्मक शक्तियों का वास होता है, जो शव जलाते वक्त और भी हावी हो जाती है .नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कोमल हदय वाली महिलाओं पर ज्यादा पड़ता है, इसलिए महिलाओं का श्मशान घाट में जाना मना होता है. क्योंकि शमशान घाट पर जाने से महिला दिमागी बीमारी से पीड़ित हो सकती है.

2. मुंडन नहीं होता शुभ -: आपने देखा होगा कि हिंदू लोग शव यात्रा में मुंडन करवाते हैं. मुंडन के पीछे वैज्ञानिक कारण है, दरअसल जब शव जल रहा होता है तो आसपास के वातावरण में बहुत ज्यादा कीटाणु फैल जाते हैं. बालों के संवेदनशील होने के कारण यह किटाणु बालो पर चिपक जाते हैं, जो जल्द ही शरीर में प्रवेश करते हैं. शास्त्रो के अनुसार पुरुष मुंडन करवा सकते हैं, लेकिन स्त्रियों का मुंडन करवाना अशुभ माना जाता है. जिस कारण स्त्रियों को शमशान घाट पर जाने की मनाही होती है.

3. आत्मा को नहीं मिलती शांति -: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब दाह संस्कार हो रहा होता है तो कोई मरने वाले व्यक्ति की याद में रोता है. इससे मृत आत्मा को शांति नहीं मिलती. महिलाओं का हृदय इस मामले में कमजोर होता है, जिससे वो श्मशान घाट जाने पर रो सकती है. ऐसा करने से मृत व्यक्ति की आत्मा को दुख होता है और उसे शांति नहीं मिलती. जिस कारण महिलाएं शमशान घाट पर नहीं जा सकती.

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