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अगर आपको भी नही मिला PM किसान सम्मान निधि का पैसा तो यहां करें शिकायत, जानिए

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मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल से ही इस बात के संकेत दे दिए हैं कि इस बार सरकार का मुख्य फोकस किसानों पर होगा. बता दें कि देश के करीब 6 करोड़ किसानों के बैंक अकाउंट में चार-चार हजार रुपये खेती-किसानी के लिए भेज दिए हैं. लेकिन 8.5 करोड़ किसान परिवार अब भी पैसे का इंतजार कर रहे हैं जिन्हें एक भी किस्त नहीं मिली है.

अगर आप भी उनमें से हैं जिनको पैसा नहीं मिला है तो आप कृषि अधिकारियों और लेखपालों से संपर्क कर सकते हैं. अपने ब्लाक पर पता करें. अपने प्रदेश के जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत डालें. हालांकि कहीं बात नहीं बन रही है तो आप सीधे मंत्रालय में फोन करके किसान हेल्प डेस्क के ई-मेल Email (pmkisan-ict@gov.in) पर संपर्क कर सकते हैं. वहां से भी न बात बने तो इस सेल के फोन नंबर 011-23381092 पर फोन करके अपनी समस्या बता दें.

यही नहीं इस योजना के वेलफेयर सेक्शन में संपर्क कर सकते हैं. बता दें दिल्ली में इसका फोन नंबर है 011-23382401, जबकि ई-मेल आईडी (pmkisan-hqrs@gov.in) है. मालूम हो कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी का कहना है कि अगर किसी असली किसान भाई के बैंक अकाउंट में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि स्कीम का पैसा नहीं पहुंच रहा है तो इसका समाधान करवाया जाएगा.

मालूम हो कि ऐसे हजारों पात्र किसान हैं जो भटक रहे हैं लेकिन उनके जिले के कृषि अधिकारियों और लेखपालों की लापरवाही से लाभ नहीं मिल पा रहा है.

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दरअसल एक ही गांव में कुछ किसानों के अकाउंट में दो बार दो-दो हजार रुपये आ गए हैं, लेकिन कुछ किसान ऐसे भी हैं जिनके अकाउंट में पहली किस्त भी नहीं पहुंची. कुछ लोगों के खाते में पहली किस्त आ गई है तो दूसरी नहीं मिली.

दरअसल ऐसे लोग सबसे पहले अपने लेखपाल और कृषि अधिकारी से पूछें कि उनका नाम लाभार्थियों की सूची में है या नहीं. बता दें कि मोदी सरकार तो देश के सभी 14.5 करोड़ किसानों को पैसा देना चाहती है. सरकार की इस मंशा को पूरा करने में यदि कोई अधिकारी बाधा बन रहा है तो उसकी कंप्लेंट करें.

आखिर कितने किसानों को मिला पैसा

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक 26 जुलाई तक 6,04,27,876 किसानों को स्कीम का लाभ मिल चुका है. लेकिन यह ध्यान रखना होगा कि देश में 14.5 करोड़ किसान हैं.

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के सबसे ज्यादा किसानों ने फायदा उठाया है. जी हां, दरअसल यहां के करीब डेढ़ करोड़ किसानों के बैंक अकाउंट में पैसा जा चुका है. जबकि दिल्ली, लक्षद्वीप और पश्चिम बंगाल के एक भी किसान को लाभ नहीं मिला. ऐसा इसलिए क्योंकि यहां की राज्य सरकारों ने केंद्र को किसानों के नाम ही नहीं भेजे. बता दें कि केंद्र पैसा देना चाहता है लेकिन ये राज्य सरकार किसानों को लाभ नहीं लेने दे रही हैं.

इन राज्यों के किसानों को मिला सबसे ज्यादा लाभ

जानकारी के लिए बता दें कि उत्तरप्रदेश के किसानों को इस स्कीम का सबसे अधिक फायदा मिला है. वहीं बीजेपी शासित अन्य राज्यों में भी किसानों को लाभ मिला है. वो राज्य एवं लाभ पाने वाले किसानों की संख्या कुछ इस प्रकार है:

गुजरात में 39.65 लाख
हरियाणा में 12.00 लाख
महाराष्ट्र में 54.82 लाख
और उत्तराखंड में 5.37 लाख

वहीं जेडीयू-बीजेपी शासित बिहार में बिहार में 23.77 लाख किसानों को लाभ मिला है. अगर कांग्रेस शासित राज्यों की बात करें तो पंजाब में पंजाब में 14.39 लाख, मध्य प्रदेश में 19.20 लाख, राजस्थान में 39.52 लाख, गैर कांग्रेसी तेलंगाना में 31.62 लाख और ओडिशा में 29 लाख इस स्कीम का लाभ उठा चुके हैं. वहीं लेफ्ट शासित केरल में 18.26 लाख किसान इस स्कीम का लाभ ले चुके हैं.

ये करना होगा पैसा पाने के लिए

मालूम हो कि इसके लिए सर्वप्रथम कृषि विभाग में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. इसके बाद लेखपाल से संपर्क करना होगा क्योंकि वही वेरीफिकेशन करेगा. इसके लिए आपको रेवेन्यू रिकॉर्ड, बैंक अकाउंट नंबर, मोबाइल नंबर आदि देना होगा. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय ब्लाक में भी इस स्कीम के लिए किसानों के नाम की एंट्री हो रही है.

ये नहीं होंगे लाभ के पात्र

आपको बता दें कि एमपी, एमएलए, मंत्री और मेयर को भी लाभ नहीं दिया जाएगा, भले ही वो किसानी भी करते हों. वहीं दूसरी तरफ मल्टी टास्किंग स्टाफ/चतुर्थ श्रेणी/ समूह डी कर्मचारियों को छोड़कर केंद्र या राज्य सरकार में अधिकारी एवं 10 हजार से अधिक पेंशन पाने वाले किसानों को भी इसका लाभ नहीं मिलेगा.

इनके अलावा कोई भी पेशेवर, डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, वकील, आर्किटेक्ट, जो कहीं खेती भी करता हो उसे इस लाभ का हकदार नहीं माना जाएगा. साथ ही पिछले वित्तीय वर्ष में इनकम टैक्स का भुगतान करने वाले भी यह लाभ नहीं ले पाएंगे.

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