Loading...

मोदी सरकार का प्राईवेट कर्मचारियों को तोहफा, अब किसी की भी सैलरी नहीं होगी 24 हजार रु महीने से कम

0 28

अगर आप भी उनमें से हैं जो किसी प्राईवेट कंपनी में काम करते हैं तो आपको बता दें कि प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए खुशखबरी आई है। जी हां, दरअसल अब मोदी सरकार के नये आदेशों के बाद प्राईवेट कंपनियों में काम करने वाले किसी भी कर्मचारी की सैलरी 24 हजार रुपये महीने से कम नहीं होगी।

दरअसल अगर कोई कंपनी अपने कर्मचारियों को 24 हजार रुपये महीने से कम देती है तो शिकायत मिलने पर सरकार उस कंपनी के खिलाफ सीधी कार्रवाई कर सकती है। यानी इसका मतलब यह है कि जो कंपनियां कम तनख्वाह पर ज्यादा काम कराती हैं अब उनकी खैर नहीं। बता दें कि अब कर्मचारी कम तनख्वाह मिलने की शिकायत सीधे नियुक्त सरकारी अधिकारी को कर सकेंगे।

आपको बता दें कि सरकार की ओर से कार्मिक और लोक शिकायत मंत्री जितेंद्र सिंह ने संसद में कहा है कि कर्मचारियों को उनके काम के बदले न्यूनतम वेतन देना आवश्यक है और जिन कंपनियों के खिलाफ इस संबंध में शिकायतें आएंगी, उनकी जांच करायी जाएगी और जो कंपनियां इन मानकों का पालन नहीं करेगी उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में एक पूरक प्रश्न के जवाब में कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने साल 2017 में न्यूनतम वेतन कानून में संशोधन किया और ऐसा 65 वर्ष बाद हुआ है। इसमें न्यूनतम मजदूरी 40% बढ़ायी गयी है। मालूम हो कि इसे 18 हजार रुपये से बढ़ाकर 24 हजार रुपये किया गया है।

Loading...

आपको बता दें कि इसके लिए कानून बनाया गया है और जो भी लोग इस कानून का अनुपालन नहीं कर रहे हैं उनकी शिकायत आने पर मामले की जांच करायी जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल जितेंद्र सिंह ने कहा कि उनकी सरकार महिला कर्मचारियों के हितों पर विशेष ध्यान दे रही है। बता दें कि प्रसवकालीन अवकाश को 12 सप्ताह से बढकार 24 सप्ताह कर दिया गया है। मालूम हो कि सरकार ने प्रधानमंत्री रोजगार योजना आरंभ की है जिसे 1 अप्रैल 2016 से सरल बनाया गया है।

आपको बता दें कि लोक शिकायत मंत्री ने कहा कि निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के हितों के लिए उनकी सरकार प्रतिबद्ध है। दरअसल इसी प्रतिबद्धता का पालन करते हुए पिछले वर्ष सरकार ने पीएफ में सरकार की हिस्सेदारी 12% कर दी है। मालूम हो कि श्रमिकों की सुविधा के लिए एक पोर्टल भी है जिसमें शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं।

मालूम हो कि अनुबंध आधारित नियुक्तियों में आरक्षण देने संबंधी सवाल पर जितेंद्र सिंह ने कहा कि जिन संस्थानों में 45 दिन से ज्यादा समय के लिए नियुक्ति की जाती है वहां इस तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं लेकिन जहां ठेकेदार नियुक्तियां करते हैं वहां आरक्षण लागू करना संभव नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि ठेकेदार अपने हिसाब से लोगों को नियुक्त करते हैं।

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.