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भारत में 5G नेटवर्क की मदद से की जाएगी गायों की निगरानी, मिलेगी रियल टाइम जानकारी

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5G नेटवर्क अभी हर जगह नहीं आया है लेकिन जहां पर भी एआ है इसने वहां धूम मचा दी है। दरअसल यही कारण है कि दुनियाभर में 5जी नेटवर्क से ड्राइवर-लेस कार, रिमोट सर्जरी और एडवांस लेवल के रोबोटिक्स को संचालित किए जाने की तैयारी की जा रही है।

लेकिन अगर भारत की बात करें तो यहां 5जी नेटवर्क इन सब तकनीकों से परे, गायों की निगरानी करने के लिए इस्तेमाल होगा। बता दें कि देश की पहली 5जी केस लैब में से एक गायों और डेयरी विकास की निगरानी करने के लिए तैयार की जाएगी।

गायों को भी किया जाएगा कनेक्ट

आपको बता दें कि इंसानों द्वारा पहनी जाने वाली Fitbits या अन्य स्मार्ट वॉच की तरह गायों पर सेंसर लगाए जाएंगे जो उनकी सेहत, उनके खान-पान और प्रजनन पर नजर रखेंगे। दरअसल इससे गायों का एक इंटरनेट ऑफ थिंग्स इकोसिस्टम तैयार हो जाएगा।

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मालूम हो कि इसके जरिए गायों के बारे में डाटा एकत्रित किया जा सकेगा और इस बात का भी अनुमान लगाया जा सकेगा कि गाय कितना दूध देगी।

आपको बता दें कि महाराष्ट्र स्थित चिताले डेयरी पिछले 1 दशक से भी ज्यादा समय से गायों पर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टैग का इस्तेमाल कर रहा है। दरअसल इसके जरिए यह डेयरी न सिर्फ गायों को ट्रैक करती है, बल्कि ऐसा करने से गायों की उत्पादकता और किसानों की कार्यक्षमता में भी इजाफा हुआ है।

दूरसंचार विभाग करेगा लैब की स्थापना

मालूम हो कि उच्च स्तर के सरकारी पैनल 5G Implementation Oversight Committee ने इस बारे में फैसला दिया है। दरअसल इसमें डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन (दूरसंचार विभाग) की भी रजामंदी है।

आपको बता दें कि देश में 5जी के लिए ट्रायल करना और कमर्शियल तौर पर उसे शुरू करने की जिम्मेदारी DoT यानी कि डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन को मिली है। बता दें कि विज्ञान व तकनीकी विभाग और राष्ट्रीय डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के साथ मिलकर दूरसंचार विभाग 5जी के इस्तेमाल के लिए केस लैब तैयार करेगा।

बढ़ेगी पशुपालक किसानों की आय

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 5जी तकनीक में ऐसी कई खूबियां हैं जिससे पशुपालक किसानों की आय बढ़ सकती है। जी हां, दरअसल 5जी स्पेक्ट्रम के जरिए बड़ी संख्या में डाटा भेजा जा सकता है। इसके जरिए डाटा भेजने में रुकावट भी नहीं आएगी। यानी किसान रियल-टाइम बेसिस पर बड़ी मात्रा में डाटा का ट्रांसफर कर सकेंगे।

यही नहीं, इसके साथ ही सर्विलांस कैमरा से किसान अपने पशुओं पर नजर भी रख सकेंगे। आपको बता दें कि इस तकनीक के जरिए दूध के उत्पादन से लेकर पेमेंट तक सब कुछ एक ही स्थान पर हो सकेगा।

मालूम हो कि पशुपालक किसानों को रियल टाइम जानकारी मिलेगी और इसकी मदद से वे गायों की उत्पादकता और अपनी आय को बढ़ा सकेंगे। यही नहीं, बड़े को-ऑपरेटिव और कंपनियां इस नेटवर्क की मदद से दूध का स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन और डिस्ट्रीब्यूशन का ट्रैक रख सकेंगी।

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