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नोटबंदी से भारत को आखिर क्या सफलता मिली, संसद में मिला इस सवाल का जवाब, जानिए

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मोदी सरकार के केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने यह दावा किया है कि वर्ष 2016 में लगाई गई नोटबंदी के बाद 1000 और 500 रुपये के पुराने नोटों की वैधता वापस लेने के बाद साल 2019 की शुरुआत तक 2000 और 500 रुपये के जाली करेंसी नोटों की जब्ती के मामले की कोई सूचना नहीं आई है.

मालूम हो कि जाली करेंसी के संबंध में सांसद खगेन मुर्मू एवं विनोद कुमार सोनकर की ओर से पूछे गए लिखित सवाल के जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह दावा किया.

दरअसल उन्होंने कहा है कि रिजर्व बैंक द्वारा बताए गए आंकड़ों एवं पुलिस एजेंसियों द्वारा की गई जब्ती से इस बात का पता चलता है कि देश में जाली भारतीय करेंसी नोटों के चलन में काफी कमी आई है.

माल्दा क्षेत्र है नकली नोटों का बड़ा स्रोत

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मालूम हो कि मंत्री के मुताबिक पश्चिम बंगाल पुलिस ने दरअसल यह सूचना दी है कि भारत-बांग्लादेश सीमा, विशेष रूप से माल्दा क्षेत्र से जाली भारतीय करेंसी नोटों आ रहे थे. पता चला है कि ऐसे सभी नोट घटिया किस्म के थे, जो कंप्यूटर से बने हुए थे.

मालूम हो कि सांसदों ने अब पूछा है कि पिछले 4 साल में जाली नोटों से देश की अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान हुआ है. बता दें कि इसके जवाब में मंत्री ने कहा है कि कोई उल्लेखनीय घाटा हुआ हो ऐसा तो फिलहाल प्रतीत नहीं होता.

आरबीआई ने किया साफ, ग्राहकों के अकाउंट में नहीं जमा होंगे जाली नोट

आपको बता दें कि मंत्री ने दरअसल यह बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक के 1 जुलाई, 2019 के पत्र के मुताबिक काउंटर या बैंक आफिस/तिजोरी में मिले जाली नोटों को ग्राहक के खाते में जमा नहीं किया जाएगा.

दरअसल आरबीआई ने यह साफ किया है और साथ ही सभी बैंकों को भी यह सलाह दी है कि वे अपनी सभी शाखाओं में कटे-फटे व खराब नोटों को स्वीकार करें. बता दें कि फाइनेंस और भुगतान बैंक यानी कि पेमेंट बैंक कटे-फटे और खराब नोटों की अपने विवेक से अदला-बदली कर सकते हैं.

जाली नोटों का चलन रुके इसके लिए किए हैं ये इंतजाम

आपको बता दें कि केंद्र की मोदी सरकार ने देश में जाली नोटों की तस्करी और चलन रोकने के लिए केंद्र-राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच जानकारी साझा कराने का फैसला लिया है. जी हां, दरअसल इसके लिए गृह मंत्रालय ने जाली भारतीय करेंसी नोट समन्वय समूह गठित किया है.

दरअसल आपको बता दें कि आतंकी गतिविधियों के फाइनेंस और जाली करेंसी के मामलों की छानबीन करने के लिए एनआईए में एक विंग का गठन किया गया है. यही नहीं, जाली नोटों की तस्करी और परिचालन रोकने के लिए भारत और पड़ोसी देश बांग्लादेश के मध्य भी एक समझौता हुआ है.

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