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फैक्ट चेक: P-500 पेरासिटामोल में है खतरनाक जहरीला वायरस, जानिए क्या है इस वायरल मैसेज की सच्चाई

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आजकल के जमाने में हर कोई सोशल मीडिया का इस्तेमाल करता है। दरअसल सोशल मीडिया एक ऐसा प्लेटफार्म है जिस पर आए दिन कुछ न कुछ वायरल होता रहता है। चाहे फिर वो कोई खबर हो या फिर कोई तस्वीर हो या कोई वीडियो हो।

ऐसा ही कुछ इन दिनों सोशल मीडिया पर हो रहा है जब कुछ ऐसी तस्वीरें जमकर वायरल हो रही हैं। दरअसल सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा है, जिसमें ऐसी पैरासिटामोल को खाने से मना किया जा रहा है, जिस पर P-500 लिखा है।

बता दें कि इसे खाने से जान का खतरा बताया जा रहा है। चलिए जानते हैं कि इस वायरल मैसेज की सच्चाई क्या है..

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ये मैसेज हो रहा है वायरल

वायरल मैसेज का कहना है कि, ‘कृपया ये पैरासिटामोल न खाएं न खरीदें जिस पर P-500 लिखा हो, इसमें एक जहरीला वायरस पाया गया है जो दुनिया के सबसे खतरनाक वायरस में से एक है। यह जानकारी सभी को भेजें’

आपको बता दें कि यह मैसेज वॉट्सऐप के साथ ही फेसबुक पर भी वायरल किया जा रहा है। हालांकि ऐसा नहीं है कि पैरासिटामोल को लेकर यह मैसेज पहली बार वायरल हुआ है दरअसल साल 2017 से ही इसे लेकर तरह-तरह की अफवाहें उड़ाई जा रही हैं।

आपको याद दिला दें कि वर्ष 2017 में भी P-500 लिखी हुई पैरासिटामोल का न खाने की अफवाह उड़ाई गई थी। दरअसल उस समय वायरल मैसेज के साथ यह भी लिखा गया था कि पी-500 लिखी हुई पैरासिटामोल बहुत सफेद और चमकदार होती है।

आपको बता दें कि इस वायरल पोस्ट में सलाह देते हुए अंग्रेजी में लिखा गया था कि पैरासिटामोल में माचुपो नामक वायरस होता है। इसे दुनिया के सबसे खतरनाक वायरस में से एक माना जाता है। इसे मैसेज को शेयर करने की अपील भी की गई थी।

मालूम हो कि इस मैसेज के साथ में एक महिला और एक युवक के फोटोज भी वायरल किए जा रहे हैं। दोनों के शरीर पर लाल चट्‌टे देखे जा सकते हैं।

जानिए आखिर क्या है सच्चाई

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस दावे की सच्चाई जानने के लिए मध्यप्रदेश के सबसे बड़ी सरकारी मेडिकल कॉलेज में से एक एमजीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ.वीपी पांडे से संपर्क किया गया। उन्होंने यह बताया कि ऐसा दावा पूर्णतयः गलत है। पैरासिटामोल में ऐसा कोई वायरस नहीं पाया होता है।

दरअसल डॉ पांडे के मुताबिक, पैरासिटामोल ओवर द काउंटर मिलती है। इसे बिना प्रिस्क्रिप्शन के भी खरीदा जा सकता है क्योंकि यह सुरक्षित और अच्छी तरह से टेस्टेड है।

आपको बता दें कि भारत के अलावा यह मैसेज अन्य कई देशों में भी पहले वायरल हो चुका है। जब मीडिया ने पड़ताल की तो मलेशिया सरकार द्वारा जारी किया गया एक लेटर मिला जिसमें साफ लिखा है कि टेबलेट में किसी तरह का कोई वायरस नहीं है।

मालूम हो कि इंडोनेशिया का फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी कि BPOM भी आधिकारिक बयान जारी कर इसमें वायरस होने की बात को खारिज कर चुका है।

इतना ही नहीं मशहूर फैक्ट चेक करने वाली वेबसाइट स्नोप्स ने भी 7 मार्च 2017 को प्रकाशित किए गए एक आर्टिकल में इस दावे को झूठा पाया था।

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