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अब भारत में क्रिप्टोकरंसी रखना एवं खरीदना-बेचना होगा अपराध, हो सकती है 1 से 10 साल तक की कैद

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क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित एक बड़ी खबर आई है. जी हां, दरअसल अब भारत में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ा हर काम अपराध कहलाएगा। बता दें कि क्रिप्टोकरेंसी बेचने-खरीदने या रखने से लेकर इससे जुड़ी किसी भी प्रकार की गतिविधि में लिप्त पाए जाने पर जेल जाना पड़ेगा। यही नहीं, लाखों रुपए का जुर्माना भी देना पड़ेगा।

दरअसल आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार भारत में क्रिप्टोकरेंसी को बैन करने के लिए कानून ला सकती है। भारत सरकार की तरफ से गठित इंटर-मिनिस्ट्रियल कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यह सिफारिश की है। मालूम हो कि सोमवार को यह रिपोर्ट वित्त मंत्रालय को सौंप दी गई।

साल 2018 तक देश में क्रिप्टोकरेंसी के कारोबार में 50 लाख ट्रेडर्स सक्रिय

आपको बता दें कि भारत सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी 2018 तक देश में क्रिप्टोकरेंसी के कारोबार में 50 लाख ट्रेडर्स तो 24 एक्सचेंज सक्रिय थे। दरअसल ये ट्रेडर्स एक दिन में एक अरब रुपए का कारोबार करते हैं। बता दें कि इस कारोबार में एक दिन में लगभग 1500 बिटकॉयन का इस्तेमाल किया जाता है।

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मालूम हो कि क्रिप्टोकरेंसी, वर्चुअल करेंसी, डिजिटल करेंसी जैसे मसलों पर रणनीति बनाने के लिए सरकार ने 2017 के नवंबर माह में आर्थिक मामलों के सचिव की अध्यक्षता में इस कमेटी का गठन किया था। कमेटी में सूचना-तकनीक सचिव के साथ सेबी चेयरमैन एवं भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर भी शामिल थे।

क्रिप्टोकरेंसी बेचा-खरीदा तो हो सकती है 10 साल तक की कैद

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कमेटी ने भारत में क्रिप्टोकरेंसी बेचने-खरीदने एवं रखने वालों को 1 साल से लेकर 10 साल तक कैद की सिफारिश की है। इसके अलावा लाखों रुपए का दंड भी देना पड़ सकता है।

मालूम हो कि इस कमेटी ने सरकार से बैनिंग ऑफ क्रिप्टोकरेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल 2019 लाने की सिफारिश की है। साथ ही इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में डिजिटल करेंसी लांच करने की भी सिफारिश की है।

क्रिप्टोकरेंसी को किसी भी देश ने नहीं दी मान्यता

दरअसल इस कमेटी ने कहा है कि भारतीय उपभोक्ताओं को क्रिप्टोकरेंसी या बिटकॉयन से सुरक्षित करना होगा, क्योंकि इसके जरिए कई उपभोक्ताओं को ठगा जा चुका है। आपको बता दें कि इस रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में बिटकॉयन के नाम पर 2000 करोड़ रुपए के घोटाले हुए और कई उपभोक्ताओं के साथ धोखा हुआ।

मालूम हो कि कमेटी ने यह भी कहा है कि किसी भी देश ने लिगल टेंडर के रूप में यानी कि उस देश की वैधानिक करेंसी के रूप में क्रिप्टोकरेंसी को मान्यता नहीं दिया है। पड़ोसी देश चीन ने भी साल 2017 में चीनी करेंसी के साथ क्रिप्टोकरेंसी के कारोबार पर प्रतिबंध लगा दिया था।

डिजिटल करेंसी की सिफारिश

आपको बता दें कि इस कमेटी की रिपोर्ट में यह कहा गया है कि सरकार चाहे तो सेंट्रल बैंक की तरफ से डिजिटल करेंसी जारी की जा सकती है। दरअसल इसे सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी यानी कि सीबीडीसी का नाम दिया जाएगा। लेकिन यह सेंट्रल बैंक की तरफ से तय किया जाएगा कि डिजिटल करेंसी 24 घंटे काम करेगी या नहीं।

मालूम हो कि नोट की तरह ही किसी को यह पता नहीं चलेगा कि कौन सी डिजिटल करेंसी कौन इस्तेमाल कर रहा है। आपको बता दें कि डिजिटल करेंसी से खुदरा एवं थोक दोनों खरीदारी संभव हो सकेगी।

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