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EPFO के मुताबिक 21 महीनों में पैदा हुई 96.6 लाख नौकरियां, अकेले अप्रैल में ही पैदा हुईं 10 लाख से ज्यादा

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नौकरियों को लेकर मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर लगातार रहती है लेकिन बीच बीच मे कुछ ऐसे आंकड़े आ जाते हैं जिनके कारण मोदी सरकार राहत की सांस ले लेती है। ऐसा ही एक और आंकड़ा अब आया है।

जी हां, दरअसल EPFO के अनुसार, वित्त वर्ष 2018-19 में देश में 61,12,223 नई नौकरियां पैदा हुई हैं। वहीं, 2017-18 (सितंबर 2017 से) में 15,52,940 नई नौकरियां पैदा हुई थीं। इस तरह सितंबर 2017 से मई 2019 तक कुल 21 महीनों में 96.6 लाख नौकरियां पैदा हुई हैं।

मालूम हो कि ईपीएफओ के मुताबिक, पिछले मई माह में 9,86,345 नई नौकरियां पैदा हुई हैं, जो कि अप्रैल महीने में आई 10,15,286 नौकरियों की तुलना में कम रही हैं।

आपको बता दें कि EPFO के आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में, 11,139 नौकरियां 18 साल से कम आयु वर्ग में देखी गई हैं। इतना ही नहीं इसके अलावा 18 से 21 साल के आयु वर्ग में 2.9 लाख नौकरियां रजिस्टर्ड हुई हैं।

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दरअसल बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मई महीने में यह सबसे ज्यादा नौकरियों वाला आयु वर्ग रहा है। इसके अलावा 22 से 25 साल के आयु वर्ग में 2.26 लाख नई नौकरियां आई हैं।

सितंबर 2017 से अप्रैल 2019 तक 21 महीने में सबसे ज्यादा नौकरियां पैदा हुई हैं। इपीएफओ के अनुसार, यह पहली बार था जब फॉर्मल जॉब क्रिएशन एक अकेले महीने में 10 लाख के आंकड़े को पार कर गया।

मालूम हो कि अप्रैल 2019 में, 8.78 लाख लोग ईपीएफ के नए सदस्य बने, जबकि 3.35 लाख लोग ईपीएफ योजना से बाहर हो गए। हालांकि एक आंकड़े के अनुसार करीब 5 लाख सदस्यों ने ईपीएफ योजना को दोबारा ज्वाइन किया और रि-सब्सक्राइब किया।

दरअसल भले ही अप्रैल के महीने में सबसे ज्यादा 10.43 लाख रोजगार पैदा हुए हों, लेकिन कुल नए रोजगार की मासिक औसत संख्या में 2000 नौकरियों की कमी आई है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईपीएफओ भारत में संगठित और अर्द्ध-संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों का सामाजिक सुरक्षा फंड मैनेज करता है। दरअसल इसके 6 करोड़ से ज्यादा एक्टिव सदस्य हैं।

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