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भारत में एडल्ट फिल्मों में आई कमी, लेकिन टीवी पर सबसे ज्यादा परोसी जा रही है अश्लीलता

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पिछले कई समय से भारत में रिलीज होने वाली फिल्मों में एडल्ट यानी कि अश्लील सामग्री बढ़ने का लगातार दावा किया जाता रहा है। हालांकि आंकड़े इसका सहयोग नहीं कर रहे हैं।

जी हां, दरअसल हकीकत यह है कि पिछले कुछ सालों में फिल्मों में एडल्ट कंटेंट में कमी दर्ज की गई है। हालांकि छोटे पर्दे पर धड़ल्ले से एडल्ट कंटेंट प्रसारित किया जा रहा है। बता दें कि टीवी प्रोग्राम के अश्लील कंटेंट को लेकर सरकार की ओर से कई बार की चेतावनी के बाद कार्रवाई की गई है।

टीवी चैनलों के खिलाफ हुई चेतावनी जारी

दरअसल सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय के मुताबिक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी कि सीबीएफसी के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 3 वर्षों में U सर्टिफिकेट की फिल्मों की संख्या में कमी दर्ज की गई है।

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वहीं दूसरी तरफ प्राइवेट टीवी चैनलों के कार्यक्रम और विज्ञापन के अश्लीलता, हिंसा में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। आपको बता दें कि इसके खिलाफ सूचना और प्रसारण मंत्रालय की तरफ से करीब दर्जन भर टीवी चैनलों के खिलाफ चेतावनी भी जारी की गई है।

इन टीवी चैनलों को जारी हुई चेतावनी

आपको बता दें कि जिन टीवी चैनलों के खिलाफ कार्रवाई हुई है। उनमें केयर वर्ल्ड, एफ टीवी, सीवीआर अंग्रेजी समाचार चैनल, ऑस्कर मूवीज, न्यूज टाइम असम, एमबीसी टीवी, पीपल टीवी, रिपोर्टर टीवी, टीवी-9 (मराठी), ऑल टीवी चैनल, वी टीवी चैनल और सीवीआर हेल्थ शामिल हैं।

फिल्मों के एडल्ट कंटेंट ऐसे हुई कमी

साल U UA A
2016-17 1209 1620 582
2017-18 836 1793 465
2018-19 1352 2515 420

फिल्मों के लिए हैं 4 कैटेगरी के सर्टिफिकेट निर्धारित

आपको बता दें कि फिल्मों के लिए 4 तरह के सर्टिफिकेट निर्धारित हैं जो इस प्रकार हैं:

U सर्टिफिकेट

बता दें कि यह सर्टिफिकेट पाई फिल्मों को हर एज ग्रुप के लोग देख सकते हैं.

U/A सर्टिफिकेट

मालूम हो कि इस कैटेगरी की फिल्मों के कुछ दृश्यों मे हिंसा, अश्लील भाषा या यौन संबंधित सामग्री हो सकती है, जिससे इस श्रेणी की फिल्में केवल 12 साल से बड़े बच्‍चे वो भी किसी बड़े की उपस्थिति मे ही देख सकते हैं।

A सर्टिफिकेट

इस सर्टिफिकेट का मतलब है एडल्ट सर्टिफिकेट यानी की फिल्‍म को सिर्फ वयस्क यानि 18 साल या उससे अधिक उम्र वाले लोग ही देख सकते हैं।

S सर्टिफिकेट

आपको बता दें कि यह स्‍पेशल कैटेगरी है और यह रेयर फिल्‍मों को ही मिलती है। दरअसल यह उन फिल्मों को दी जाती है जो पार्टीकुलर किसी एक वर्ग के लिए जैसे कि इंजीनियर या डॉक्टर आदि के लिए बनाई जाती हैं।

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