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अगर आप इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने का बना रहे हैं मन तो जान लीजिए ये नियम, नहीं होगा कोई नुकसान

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एक तरफ दिन प्रतिदिन बढ़ती पेट्रोल/डीज़ल की कीमतें और दूसरी तरफ तेज़ी से बढ़ता प्रदूषण, ये दो ऐसे प्रमुख कारण हैं जिनकी वजह से इलेक्ट्रिक वाहन बाजार का काफी सुनहरा भविष्य खासतौर पर भारत में दिखलाई दे रहा है.

वहीं दूसरी तरह इस समय देश में भी इलेक्ट्रिक वाहनों की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. दरअसल उत्तर प्रदेश और दिल्ली में सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीदारी हो रही है. इसी क्रम में कई वाहन निर्माता कंपनियां इलेक्ट्रिक कारों को बाजार में उतारने में लगी हैं.

हालांकि केंद्र की मोदी सरकार ने शुक्रवार को कहा कि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए दी जाने वाली सब्सिडी सिर्फ कॉमर्शियल वाहनों के लिए उपलब्ध होगी. जी हां, दरअसल निजी इस्तेमाल के लिए खरीदने वाले व्हीकल्स को सब्सिडी स्कीम शामिल नहीं किया जाएगा.

आपको बता दें कि एक कार्यक्रम में शिरकत लेने वाले केंद्रीय भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उपक्रम राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि चाहे बाइक हो, कार हो, ट्रक हो, बस हो या ई-रिक्शा हो, सरकार का अनुमान है कि इन सभी कैटेगरी में देश इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को अपनाएगा. दरअसल उन्होंने कहा कि पेरिस संधि के तहत कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए यह बदलाव अति आवश्यक है.

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10 हजार करोड़ रुपये की फेम योजना

मालूम हो कि मेघवाल ने भारत ब्रिटेन मोबिलिटी फोरम 2019 में शिरकत किया था। उन्होंने यहां कहा कि, ‘‘सरकार ने कॉमर्शियल व्हीकल्स मालिकों के जरिए इलेक्ट्रिक वाहन को बढ़ावा देने की नीयत साफ कर दी है और सिर्फ उन्हें ही प्रोत्साहन मिलेगा.’’

आपको बता दें कि 10 हजार करोड़ रुपये की फेम योजना के तहत कॉमर्शियल इस्तेमाल के थ्रीव्हीलर्स और फोर व्हीलर्स पर सब्सिडी दी जाती है. यह सब्सिडी निजी इस्तेमाल के दोपहिया वाहनों पर भी मिलती है.

दरअसल विभिन्न वाहन कंपनियां इलेक्ट्रिक वाहनों को लोकप्रिय बनाने और उन्हें किफायती बनाने के लिए निजी इस्तेमाल वाले वाहनों पर भी सब्सिडी देने की मांग कर रही हैं. बता दें कि मेघवाल ने इलेक्ट्रिक वाहनों की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों को साफ पर्यावरण देने के लिए यह एकमात्र जरिया है और इसको बढ़ावा देना मोदी सरकार का लक्ष्य है.

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