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कभी भारत के लिए खेला था फुटबॉल, आज पेट पालने के लिए बकरियां चराने और दिहाड़ी करने पर है मजबूर

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भारत में खेलों का स्तर बढ़ाने के लिए सरकार काफी जोर दे रही है. लेकिन अभी तक इस मामले में ज्यादा कामयाबी नहीं मिली है, क्योंकि कई खेलों के खिलाड़ी अभी भी आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हो पाए हैं. राष्ट्रीय स्तर की महिला फुटबॉलर अपने घर को चलाने के लिए दिहाड़ी मजदूरी करने और बकरियां चराने को मजबूर है.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, तनुजा बागे ओडिशा और इंडियन टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी है 20 साल की तनुजा बागे गोलकीपर के रूप में खेला करती थी. लेकिन गरीबी की वजह से उनको खेल छोड़ना पड़ा और अपने जीवन का गुजारा करने के लिए मजदूरी कर रहे हैं. तनुजा बागे ओडिशा के झारसुगुडा जिले के देबादिही गांव की रहने वाली है. उन्होंने कई ईनाम जीते. उनको सरकार की ओर से मदद का इंतजार है.

फुटबॉल के साथ ही रग्‍बी में भी पारंगत

तनुजा बागे का जन्म बहुत ही गरीब परिवार में हुआ. 14 साल की उम्र में उन्होंने फुटबॉल खेलना शुरू कर दिया था. उन्होंने ब्रज नगर में कुछ सीनियर फुटबॉलर्स के साथ ट्रेनिंग ली. इसके बाद उनका चयन ओडिशा की टीम में हुआ. यहां अच्छा प्रदर्शन करने के बाद उन्हें भारतीय टीम में गोलकीपर के रूप में जगह मिली. उन्होंने 2011 में भारतीय टीम के लिए 4 मैच खेले. तनुजा फुटबॉल के साथ रग्‍बी में भी नेशनल लेवल तक खेल चुकी हैं. तनुजा बागे ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में बताया कि गरीबी की वजह से मेरा खेल छूट गया है. मुझे अपना पेट पालने के लिए संघर्ष करना पड़ा है.

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झोपड़ी में रहने को मजबूर

तनुजा बागे के पास रहने के लिए पक्का घर नहीं है. उनके पति दिहाड़ी मजदूर हैं. उन्होंने सरकारी जमीन पर एक झोपड़ी बनाई हुई है और उसी में रहती हैं. तनुजा की एक 3 साल की बेटी है. उनका घर सरकार से मिलने वाले राशन से चलता है.

कम सैलरी के चलते छोड़ी प्राइवेट नौकरी

तनुजा बागे ने आगे ने बताया कि उन्हें एक प्राइवेट स्कूल में बच्चों को फुटबॉल की ट्रेनिंग देने के लिए रखा गया. उन्हें महीने के 8000 रुपए देने का वादा किया था. हालांकि उनको केवल 3000 ही दिए गए, जिस वजह से उन्होंने नौकरी छोड़ दी.

क्राउडफंडिंग से मदद की कोशिश

तनुजा बागे को प्रशासन ने मदद का आश्वासन दिया है. वर्तमान कलेक्टर ज्योति रंजन प्रधान ने कहा कि वो जल्द ही तनुजा से मिलेंगे और उनको हर संभव मदद उपलब्ध कराएंगे. यह खबर मिलने के बाद कई लोगों ने क्राउडफंडिंग के जरिए उनकी मदद करने का सोचा है.

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