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आखिर कैसे बनती है बुलेटप्रूफ जैकेट और ये कैसे रोक पाती है गोली, जानिए इसका पूरा इतिहास

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आप सभी ने ज्यादातर फिल्मों में देखा होगा कि हीरो को गोली लग जाती है। लेकिन इसके बाद भी हीरो जिंदा बच जाता है। क्योंकि उस हीरो ने वहां पर बुलेट प्रूफ जैकेट पहनी होती है। जी हां वैसे तो हमें बुलेट प्रूफ शब्द का पता फिल्मों को देखकर ही लगा है। हम राजनीति के जरिए फिल्मों के जरिए ही शब्द से वाक्य हुए हैं। देश की बड़ी बड़ी राजनीति हस्तियां भी अपनी सुरक्षा के लिए बुलेट प्रूफ जैकेट का इस्तेमाल करती है। और यह गोलियों के असर को खत्म कर देती है। लेकिन क्या आप जानते हैं। बुलेट प्रूफ जैकेट की टेक्नोलॉजी क्या है। आइए आज हम आपको बताते हैं। प्रूफ जैकेट से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में।

15 शताब्दी में आया था बुलेट प्रूफ जैकेट का आईडिया

आपको बता दें कि पहले के जमाने में लोग घायल होने से बचने के लिए जानवरों की चमड़े की इस्तेमाल करते थे। फिर जैसे-जैसे एडवांस याद आने लगे वैसे वैसे सुरक्षा के मायने बदल गए। फिर लकड़ी और धातु से बने कब्जों का इस्तेमाल किया जाने लगा। बुलेट प्रूफ जैकेट का एरिया शताब्दी के दौरान आया। जब इटली के लोगों ने इसको अपना सुरक्षा कवच बनाया। उस समय गोली कवच को पार नहीं करती थी। बल्कि उसको देख कर अपनी दिशा को बदल लेती थी। इससे जैकेट पहने वाले इंसान पर गोली का कोई भी असर नहीं होता है। लेकिन वे कवच कुछ ज्यादा खास नही थे ।आपको बता दें इसके बाद 18वीं शताब्दी के दौरान जापान में सिल्क ने कवच को बनाया था। वह कवच असरदार तो थे लेकिन काफी ज्यादा महंगे थे।

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1960 में केवलर की खोज

आपको बता दें कि 1901 में अमेरिका के 25 राष्ट्रपति विलियम मैंकिनली की हत्या कर दी गई थी। जिसके बाद अमेरिकी सेना को इंसानी शरीर के लिए मुलायम कागज की जरूरत महसूस हुई सिल्क से बने बैग में आ रही गोलियों से बचाव के लिए काफी ज्यादा असरदार थे।

लेकिन नई पीढ़ी के तोप और बंदूक का मुकाबला करने में सक्षम नहीं थे। इसलिए ये सिल्क से बने कवच अब ज्यादा काम के नहीं रह गए थे। वहीँ दूसरे विश्व युद्ध के दौरान फ्लैक जैकेट का आविष्कार हुआ। इसको बनाने के लिए बैलिस्टिक नाइलॉन फाइबर का इस्तेमाल किया जाता था। हालाकिं यह जैकेट गोला बारूद से बचने के लिए सक्षम थी।

टायर से अब जैकेट में शुरू हुआ केवलर का इस्तेमाल

शुरू में केवलर फाइबर की खोज टायर बनाने के लिए की गई थी। हालाकिं पहले इस बात को सोचा होगा कि महज बड़े बड़े टायरों के इस्तेमाल के लिए इस फाइबर का इस्तेमाल किया जायेगा। लेकिन यह काफी ज्यादा मजबूत दिखाई दिया बता दें कि यह फाइबर वजन में हल्का होता है लेकिन काफी मजबूत होता है। बता दें कि केवरल वैसे तो एक प्लास्टिक होता हैं। इतना ही नहीं यह काफी ज्यादा लचीला भी होता हैं। अपने गुणों के कारण केवलर किसी इंसान की तरफ आने वाली गोली को रोकने के लिए पूरी तरह से सक्षम हैं।

जानिए कैसे बनती हैं बुलेटप्रूफ जैकेट

पहले इस फाइबर की रसायनों के एक घोल में कताई होती है और उसकी मदद से धागे की बड़ी सी रील तैयार की जाती है। इसके बाद इस धागे पर बैलिस्टिक की चादर चढाई जाती हैं। इसके बाद इन सब को आपस में सिलकर इसकी प्लेट को बनाया जाता हैं। इतना ही नहीं इन पैनलों को जैकेट में फिट किया था हैं। जैकेट में बैलिस्टिक पैनलों को फिट करने के लिए जेब होती हैं।

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