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इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर इस शख्स ने शुरू किया ऐसा स्टार्टअप, जो भिखारियों को देता है नौकरी

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अक्सर हमारा सामना समाज के एक ऐसे चेहरे से भी हो जाता है जिनको देखकर हमें दया भी आती है और उनके ऐसा होने पर अफसोस भी महसूस होता है. जी हां, दरअसल हम बात कर रहे हैं भीख मांगने वाले लोगों यानी कि भिखारियों की.

दरअसल उनकी हालत देखकर कई बार हम उन्‍हें कुछ खाने-पीने को दिला देते हैं तो कई बार उनको कुछ पैसे देकर उनकी मदद करते हैं लेकिन एक शख्‍स ऐसा भी है, जिसने भिखारियों की ऐसी हालात पर कुछ ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया है.

दरअसल इस व्‍यक्‍ति ने ऐसे लोगों को जॉब देने का फैसला किया. आपको बता दें कि इस शख्‍स का नाम है गणपत यादव. मालूम हो कि गणपत ने एक मल्‍टीनेशनल कंपनी में इंजीनियर की पोस्‍ट छोड़कर इस दिशा में सोचना शुरू किया और फिर रिसर्च शुरू किया.

मालूम हो कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गणपत ने सोचा कि क्‍यों न ऐसे लोगों को कुछ स्‍किल ट्रेनिंग देकर उन्‍हें आत्‍मनिर्भर बनाया जाए. दरअसल इसी ख्याल के बलबूते उन्होंने अपने स्‍टार्ट-अप की शुरुआत की. उन्होंने आर्गेनिक फार्मिंग को शुरू किया.

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बता दें कि इस योजना के तहत उन्होंने 100 से ज्‍यादा भिखारियों को जोड़ा. दरअसल ये लोग हरी सब्जियां और मौसमी फल आदि फसल पैदाकर बाजार में बेचते हैं और उससे मिले पैसे से भिखारियों को उनकी सैलरी दी जाती.

बच्‍चों को दे रहे एजुकेशन

आपको बता दें कि गणपत के इस अनोखे स्टार्टअप की बदौलत जहां एक तरफ भिखारियों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा, वहीं दूसरी तरफ आर्गेनिक फार्मिंग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. सिर्फ इतना ही नहीं इस स्टार्टअप से हो रही आमदनी से भीख मांगने वाले बच्चों को आर्गेनिक फार्मिंग के गुर सिखाने के साथ-साथ उन्हें एजुकेशन भी दी जा रही है.

ऑर्गेनिक फार्मिंग से मिलता है काफी फायदा

मालूम हो कि गणपत का यह मानना है कि ऑर्गेनिक फार्मिंग से अच्छे रिटर्न मिलते हैं, इसीलिए वो प्रोफेशनल लोगों को जोड़ने के बजाये आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के लोगों को इससे जोड़ने पर बल दे रहे हैं.

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