Loading...

अब साल में बैंक से एक लिमिट से ज्यादा निकाला कैश तो देना पड़ेगा टैक्स, लोकसभा में पास हुआ बिल

0 50

अब बैंक से एक लिमिट से ज्यादा पैसे निकालने पर आपको टीडीएस का भुगतान करना होगा. जी हां, दरअसल अगर अब आप बैंक से एक लिमिट से ज्यादा कैश विदड्रॉल करेंगे तो उस पर 2% का TDS देना होगा. साथ ही, इसमें आपके सभी अकाउंट शामिल होंगे.

बता दें कि इस नए नियम के मुताबिक, 1 करोड़ से ज्यादा कैश विदड्रॉल पर बैंक अब 2% TDS काटेंगे. सरकार ने फाइनेंस बिल में संशोधन किया है.

मालूम हो कि अब यह TDS किसी शख्स के सभी बैंक अकाउंट को मिलाकर साल में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा के किए गए कैश विदड्राल पर लगेगा. आपको बता दें कि बजट में किए गए इस प्रस्ताव का मकसद कैश ट्रांजेक्शन को कम करना है.

यही कारण है कि सिर्फ एक अकाउंट से साल में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा के कैश विदड्रॉल पर 2% TDS प्रस्ताव का गलत इस्तेमाल हो सकता था. इसलिए सरकार ने फाइनेंस बिल 2019 में संशोधन कर इसे एक अकाउंट से बढ़ाकर मल्टीपल बैंक अकाउंट से विदड्रॉल तक लागू कर दिया.

Loading...

सरकार ने क्यों लागू किया नया कानून

मालूम हो कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में कहा है कि कुछ कंपनियों बड़े पैमाने पर कैश निकाल रही थी. यही कारण है कि इस प्रवृत्ति को देखते हुए सरकार ने एक सीमा से अधिक के कैश निकालने पर 2% TDS यानी कि धन के स्रोत पर कर की कटौती लगाया है.

जानिए क्या होता है फाइनेंस बिल

आपको बता दें कि फाइनेंस बिल को मनी बिल भी कहा जाता है. दरअसल ये संविधान के आर्टिकल 110 के अंतर्गत आता है. मालूम हो कि सरकार जब भी टैक्सेशन में बड़े बदलाव करती है तो वो इसी इंस्ट्रूमेंट के जरिये करती है यानी कि फाइनेंस बिल के जरिये बदलाव होता है.

बता दें कि अगर सरकार को नया टैक्स लगाना है तो वो फाइनेंस बिल में दर्ज करेंगे. हालांकि अगर किसी तरह का टैक्स खारिज करना है या फिर टैक्सेशन स्लैब में किसी तरह का बदलाव करना है तो वो सब फाइनेंस बिल में ही आएगी.

जानिए क्या होता है TDS

साधारणतः टीडीएस का नाम सुनते ही कई लोगों की परेशानियां बढ़ जाती हैं. लेकिन आपको बता दें कि टीडीएस शुरू करने का मकसद था सोर्स पर ही टैक्स काट लेना. दरअसल अगर किसी की कोई आमदनी होती है तो उस आमदनी से टैक्स काटकर व्यक्ति को बाकी रकम दी जाए तो जो टैक्स के रूप में काटी गई रकम है उसी को टीडीएस कहते हैं.

दरअसल केंद्र सरकार टीडीएस के जरिए टैक्स के तौर पर अपना राजस्व बढाती है. बता दें कि यह अलग-अलग तरह के आय सॉर्स पर काटा जाता है जैसे सैलरी, किसी निवेश पर मिले ब्याज या कमीशन इत्यादि पर.

फाइनेंस बिल पास होने के बाद लागू हो जाएगा कैश विदड्रॉल का नया नियम

(1) दरअसल अगर आप भारतीय हैं और आपने डेट म्यूचुअल फंड्स में निवेश किया है तो इस पर जो आय प्राप्त हुई उस पर कोई टीडीएस नहीं चुकाना होगा लेकिन अगर आप एनआरआई यानी कि अप्रवासी भारतीय हैं तो इस फंड से हुई आय पर आपको टीडीएस देना होगा.

(2) मालूम हो कि जो पेमेंट कर रहा है टीडीएस सरकार के खाते में जमा करने की जिम्मेदारी भी उसकी होगी. दरअसल टीडीएस काटने वालों को डिडक्टर भी कहा जाता है. वहीं जिसे टैक्स काट के पेमेंट मिलती है उसे डिडक्टी कहते हैं.

(3) आपकी जानकारी के लिए बता दें कि TDS की पूरी जानकारी फार्म 26AS में एक टैक्स स्टेटमेंट के तौर पर दिखाई जाती है कि काटा गया टैक्स और व्यक्ति के नाम या पैन में जमा किया गया है. दरअसल हर डिडक्टर को टीडीएस सर्टिफिकेट जारी करके ये बताना भी जरूरी है कि उसने कितना टीडीएस काटा और सरकार को जमा किया.

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.