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गरीबी को जड़ से मिटाने के लिए मोदी सरकार खत्म कर देगी मनरेगा स्कीम- नरेंद्र सिंह तोमर

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क्या मोदी सरकार मनरेगा स्कीम को खत्म करने के विचार में है? दरअसल लगता तो कुछ ऐसा है। जी हां, दरअसल देश के केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इसी ओर संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि मोदी सरकार मनरेगा को हमेशा के लिए जारी रखने के पक्ष में नहीं है। उनके अनुसार यह योजना गरीबों के हित के लिए है जबकि मोदी सरकार का अंतिम लक्ष्य गरीबी खत्म करना है। ऐसे में गरीबी मिटाने के बाद सरकार मनरेगा को खत्म कर देगी।

मनरेगा के बजट में हुई है बढ़ोतरी

दरअसल नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि साल 2018-19 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट यानी कि मनरेगा के तहत 55,000 करोड़ रुपए का आवंटन हुआ था, जबकि इस वित्त वर्ष में यह बढ़कर 60,000 करोड़ रुपए हो गया है।

दरअसल उन्होंने बताया कि हमने मनरेगा स्कीम में कुछ सुधार किए हैं जिससे यह बेहतर हुई है। अब 90% मजदूरों की मजदूरी सीधे उनके बैंक अकाउंट में आती है। यानी बिचौलियों का खेल अब खत्म हो चुका है।

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सरकारी योजनाओं में हो रहा अधिक निवेश

आपको बता दें कि तोमर के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी के पहले कार्यकाल के दौरान MGNREGA, PMAY, PMGSY जैसी विभिन्न सरकारी स्कीमों का कुल बजट पिछली सरकार के कार्यकाल के मुकाबले 76% बढ़ा था।

उन्होंने बताया कि यह साल 2009-2014 में 3.58 करोड़ रुपए था, जबकि साल 2014-2019 में यह 5.77 लाख करोड़ रुपए हो गया। इसके अलावा NABARD की तरफ से ग्रामीण विकास मंत्रालय को बजट के अतिरिक्त भी धन का आवंटन किया जाता है।

महिला स्वयं सहायता समूहों की सराहना

दरअसल केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों की सराहना भी की। उन्होंने इन समूहों की प्रशंसा करते हुए कहा कि, ये समूह ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार मुहैया करा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि सरकार ने इन समूहों को 2 लाख करोड़ रुपए के लोन दिए हैं और ये समूह समय पर अपना कर्ज चुका रहे हैं। यही कारण है कि इनका एनपीए सिर्फ 2.7% है। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े काॅरपोरेट‌ हाउसेज को इन समूहों से सीखना चाहिए।

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