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प्रदूषण को लेकर NGT ने लिया कड़ा फैसला, प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्रीज पर 3 महीने में लगेगा ताला

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ये तो हम सब जानते हैं कि हमारे देश में प्रदूषण एक गंभीर समस्या है और इससे भारत की ज्यादातर आबादी परेशान है। वैसे इस समस्या के निवारण हेतु बीते कुछ समय में काफी प्रयास किए गए हैं लेकिन लगता नहीं कि ये प्रयास काफी हैं इसीलिए अब इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए देश के नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी कि NGT ने एक और कड़ा फैसला लिया है।

दरअसल एनजीटी ने सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड यानी कि CPCB को एक खास तरह का निर्देश दिया है। बता दें कि इस निर्देश के अनुसार देशभर के ‘critically polluted area’ यानी कि नाजुक रूप से प्रदूषित इलाके और ‘severely polluted area’ यानी कि गंभीर रूप से प्रदूषित क्षेत्रों में मौजूद प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्रीज को 3 महीने में बंद किया जाए।

आपको बता दें कि एनजीटी ने यह फैसला देते हुए कहा कि, आर्थिक विकास लोगों के स्वास्थ्य को दांव पर लगाकर नहीं किया जा सकता। मालूम हो कि इस फैसले से ‘सफेद और हरी’ यानी गैर-प्रदूषणकारी इंडस्ट्रीज के संचालन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

प्रदूषणकारी इकाइयों की है 3 तरह की कैटेगरी

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आपको याद दिला दें कि वर्ष 2009-10 में CPCB और स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने मिलकर एक अध्ययन किया था। दरअसल इस अध्धयन के अनुसार देशभर के औद्योगिक क्ल्स्टर्स को इस आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में रखा गया था कि वे कितने प्रदूषित हैं।

मालूम हो कि इस अध्ययन में 3 तरह की कैटेगरी तय की गई थी, जोकि इस प्रकार है:

1) critically polluted area यानी कि नाजुक रूप से प्रदूषित इलाके

2) severely polluted area यानी कि गंभीर रूप से प्रदूषित इलाके

3) और अन्य प्रदूषित क्षेत्र।

जो इकाइयों फैलाती हैं प्रदूषण उनपर लग सकता है जुर्माना

मालूम हो कि मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने सीपीसीबी को निर्देश दिया है कि वह राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के साथ मिलकर दो तरह के काम करे।

पहला तो ये कि वो आकलन करे कि इन क्षेत्रों में प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों ने पिछले 5 साल में कितना प्रदूषण फैलाया है और दूसरा ये कि इसके लिए इनसे कितना मुआवजा लिया जाना चाहिए।

दरअसल यहां आपको बता दें कि इस मुआवजे में उस क्षेत्र को प्रदूषण मुक्त बनाने में लगने वाली राशि और लोगों को सेहत और पर्यावरण को हुए नुकसान को शामिल किया जाएगा।

अगली सुनवाई होगी 5 नवंबर को

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रिब्यूनल ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को यह भी निर्देश दिया है कि परिस्थिति को सुधारने के लिए एक्शन प्लान पर काम करना शुरू कर दिया जाए। यही वजह है कि ट्रिब्यूनल ने CPCB से 3 महीने के अंदर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है और मामले की सुनवाई के लिए 5 नवंबर तारीख तय की है।

यही नहीं इसके अलावा एनजीटी बेंच ने यह भी आदेश दिया कि इन ‘लाल’ और ‘नारंगी’ कैटेगरी वाली इकाइयों को तब तक विस्तार नहीं दिया जाएगा जब तक:

1) इनसे प्रभावित हुए क्षेत्रों का प्रदूषण स्तर कम करके एक सीमा के अंदर ना आ जाए

2) या फिर उस क्षेत्र की सहन करने की क्षमता का आकलन नहीं कर लिया जाए।

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