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सेहत के लिए बेहद लाभकारी है रुद्राक्ष पहनना, होते हैं कई लाभ

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बहुत समय से इस बात को कहा जाता है। कि भगवान शिव की आंखों से पानी की कुछ बूंदें जब धरती पर गिरती है तो महान रुद्राक्ष का जन्म होता है। इसके बाद भगवान शिव की आज्ञा से पेड़ों पर रुद्राक्ष फलों के रूप में प्रकट हो गए थे।

इतना ही नहीं शिव पुराण के मुताबिक, शिवजी के प्रतीक रुद्राक्ष को पहनने से शिव के यानी कि भोले के भक्तों के सभी दुख दूर हो जाते हैं। और उनकी सारी मनोकामनाएं सारी इच्छाएं पूरी हो जाती है। आपको बता दें रुद्राक्ष को चंद्रमा का कारक रचना माना गया है। इसलिए अगर कोई व्यक्ति अपने अंदर एकाग्रता को पैदा करना चाहता है। तो वह रुद्राक्ष को धारण कर सकता है।

आयुर्वेद के मुताबिक रुद्राक्ष एक तरह का फल होता है। जिसके अंदर कई सारे औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। रुद्राक्ष धारण करने से या ऐसे पानी में कुछ घंटे रखकर उस पानी को पीने से दिल से संबंधित सभी बीमारियां दूर हो जाती हैं। इतना ही नहीं इंसान मानसिक तनाव से मुक्त होता है। इसके साथ ही ऐसा करने से याददाश्त में तेजी होती है।

रुद्राक्ष के हैं कई

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आपको बता दें कि रुद्राक्ष दुनिया भर में सभी जगह अलग-अलग नामों से जाना जाता है। जिसमें से कुछ इसके खास नाम है जैसे पावन, शिवाक्ष, रुद्राक्ष, भूत नाशक, मील कटाक्षा, अमर, पुष्प चमर, रुद्राक्ष अप कम अक्कम आदि।

आयुर्वेद के साथ रुद्राक्ष

आपको बता दें कि आयुर्वेद और पुराणों में भी रुद्राक्ष को काफी ज्यादा फलदाई माना जाता है। इसके अंदर लोहा, जस्ता, मैग्नीज, एल्युमीनियम, फास्फोरस कैलशियम, कार्बोनेट, सोडियम, जैसे कई सारे गुण मौजूद होते हैं। जिसके चलते लकड़ी का होने के बावजूद इसके भीतर घनत्व के कारण यह पानी में डूब जाता है। रुद्राक्ष के दानों में गैसीय तत्व पाए जाते हैं। जिसमें तांबा आयरन की मात्रा होती है।

आयुर्वेद में रुद्राक्ष का लाभ

आपको बता दें कि रुद्राक्ष को साफ पानी में 3 घंटे रखकर उसका पानी किसी अन्य पात्र में निकाल कर पीने से बेचैनी घबराहट आंखों में जलन शांत हो जाती है। दो बूंद रुद्राक्ष का जल दोनों कानों में डालने से कान की समस्याओं से निजात मिलता है। इतना ही नहीं इसके जल को पीने से हृदय रोग भी कम हो जाते हैं।

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