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चाणक्य नीति: इन तीन तरह के लोगों से हमेशा सोच समझकर ही करनी चाहिए दोस्ती

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इतिहास से लेकर वर्तमान समय तक आचार्य चाणक्य विवेक और चतुराई की हमेशा से ही तारीफ की जाती है। चाणक्य ने अपने अनुभव ज्ञान और बुद्धि के जीवन में काफी सफलताएं प्राप्त की है। इतना ही नहीं उन्होंने कई सारी ऐसी नीतियां भी बनाई थी। जिनका आज के समय में भी काफी ज्यादा महत्व है। अगर आज के समय में भी हम इन नीतियों का पालन करते हैं। तो आज के समय में हम सारी सुख सुविधाओं को प्राप्त कर सकते हैं। आपको बता दें चाणक्य ने अपने नियमों में तीन तरह के व्यक्तियों से हमेशा सावधान रहने की सलाह दी हैं।

कवय: किं न पश्यन्ति किं न कुर्वन्ति योषित:।

मद्यपा किं न जल्पन्ति किं न खादन्ति वायसा:।।

आप सभी ने एक मशहूर कहावत तो जरूर सुनी होगी। जहां न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि यानी कि इस कहावत का मतलब है। जहां सूर्य की रोशनी नहीं पहुंच सकती है। वहां कवि की सोच पहुंच जाती है। यानी कि कभी अपनी कविता के माध्यम से बड़ी से बड़ी बात को आसानी से कहना बखूबी जानता है। इसीलिए चाणक्य के नियम के मुताबिक कभी उसे कभी भी भूलकर दुश्मनी नहीं करनी चाहिए।

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हम सब को यह सलाह दी जाती है कि हमें अच्छी संगति के दोस्तों के साथ रहना चाहिए। हमें कभी भी जुआरी शराबी ऐसे लोगों के बीच नहीं रहना चाहिए। आपको बता दें जो व्यक्ति हमेशा शराब के नशे में होता है। उसके साथ हमें कभी भी दोस्ती नहीं रखनी चाहिए। नशे में धुत व्यक्ति अपनी सारी मर्यादाओं को भूल जाता है। उसके मन में जो आता जाता है। वह वो सामने बोल देता है। इसलिए चाणक्य के नियम के मुताबिक हमेशा नशा करने वाले व्यक्तियों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

चाणक्य के नियमों के मुताबिक आदमियों की तुलना से महिलाओं में दुस्साहस होता है। इस दुश्मन के कारण महिलाएं कई बार ऐसा काम कर जाती है। इसके बारे में पुरुष कभी नहीं सोच सकते हैं। इसलिए कभी भी ऐसा नहीं करना चाहिए।

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