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इंश्योरेंस पॉलिसी लेते वक्त जरूर रखें इन बातों का ध्यान, वरना हो जाएगा लाखों का नुकसान

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लोगों का भविष्य सुरक्षित हो इसके लिए बाजार में कई तरह के इंश्योरेंस प्लान उपलब्ध हैं। दरअसल इन पॉलिसी को जहां कुछ लोग फिजूलखर्ची मानते हैं, वहीं कुछ इसे अपनी जरूरत मानते हैं। वैसे देखा जाए तो यह इंश्योरेंस आपके लिए बेहद जरूरी होती है। लेकिन इससे धोखाधड़ी भी काफी होती है और आपको लाखों का नुकसान हो सकता है। ऐसे में आपको इसे खरीदते समय कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। चलिए जानते हैं उन बातों के बारे में..

मिस सेलिंग के जरिए होती है धोखाधड़ी

आपको बता दें कि मिस सेलिंग के जरिए कंपनियां ग्राहकों से धोखाधड़ी करती हैं। जी हां, दरअसल मिस सेलिंग में बीमा या किसी भी उत्पाद को ऐसी वजहें या लाभ बताकर बेचा जाता है, जो कि वास्तव में उसमें शामिल नहीं होती।

मालूम हो कि ऐसे में फ्रॉड से बचने के लिए आपको कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। दरअसल बीमा एजेंटों द्वारा अधिक कमीशन के लालच में कई बार ग्राहकों को ऐसी पॉलिसी बेच दी जाती है, जिसके लिए उन्हें लंबे समय तक काफी अधिक प्रीमियम चुकाना पड़ता है।

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एजेंट के बहकावे में न आएं

ऐसा भी देखा गया है कि एजेंटों द्वारा ग्राहकों के लिए उपयोगी न होने पर भी उन्हें प्रोडक्ट बेचा जाता है। सिर्फ इतना ही नहीं, किसी प्रोडक्ट से जुड़े जोखिमों को छुपाकर, ग्राहक को उसके लिए जरूरी जानकारियां न देकर या गलत सलाह देकर प्रोडक्ट बेचने की प्रवृत्ति भी अकसर देखने को मिलती है।

बचें भ्रामक फोन कॉल से

आपको बता दें कि भ्रामक फोन कॉल के जरिए मिस सेलिंग का और भी बढ़ जाना बीमा उद्योग के लिए परेशानी व बदनामी का सबब बनता जा रहा है। इसमें कॉल करने वाले गलत जानकारी देने के साथ ही ब्याज मुक्त लोन व भारी बोनस जैसे झूठे वादे करके ग्राहकों को जाल में फंसाते हैं।

दरअसल कई बार तो वह मौजूदा पॉलिसी सरेंडर करके नई पॉलिसी लेने की सलाह तक देते हैं, जिससे ग्राहक को दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है।

बता दें कि जांच करने पर पता चला है कि अकसर ऐसा करने वाले लोग पूर्व में कभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बीमा कंपनी से जुड़े होते हैं तथा अलग होने के बाद भी खुद को कंपनी से जुड़ा बता कर इस तरह की हरकतें करते हैं।

आंख बंदकर न मानें एजेंट की बात

ऐसा पाया गया है कि बीमा एजेंट ग्राहकों को पॉलिसी बेचने के लिए बड़े-बड़े दावे करते हैं। जैसे, भारी गारंटीड रिटर्न मिलेगा, 5 साल तक ही आपको प्रीमियम जमा करना है, आगे कंपनी करेगी आदि। सबसे आम बात जो सुनने में आती है, वह यह कि रिटर्न गारंटीड है, आप फॉर्म पर साइन कर दीजिए आगे मैं सब भर लूंगा।

दरअसल अकसर लोग इन सभी बातों पर यकीन कर पॉलिसी खरीद लेते हैं। लेकिन क्या एजेंट द्वारा कही गई सभी बातें वास्तव में सही होती हैं? तो इसका सीधा जवाब है बिलकुल नहीं।

दरअसल, बीमा एजेंट बीमा बेचने के चक्कर में ग्राहक को वही सब बातें बताता है, जो ग्राहक को सुननी अच्छी यानी लुभावनी लगती हैं और पॉलिसी से जुड़ी तकनीकी चीजों के बारे में जानकारी नहीं देता।

दरअसल, बीमा आपके मकान और कार के बाद तीसरा सबसे बड़ा महंगा उत्पाद होता है। इसलिए, उपभोक्ता जितनी जागरूकता और पूछताछ मकान और मनपसंद कार खरीदने में करता है, उतनी ही सूझबूझ और समझदारी उसे बीमा उत्पाद खरीदने में भी दिखानी चाहिए।

दस्तावेज पर दस्तखत करने से पहले उसे पूरा पढ़ें

ऐसा अकसर देखा गया है कि बीमा के प्रपोजल फॉर्म पर उपभोक्ता बिना उसे पूरा पढ़े दस्तखत कर देता है। दरअसल यह गलत है, ऐसा इसलिए क्योंकि प्रपोजल फॉर्म महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, जिसके आधार पर ही कंपनी पॉलिसी जारी या खारिज करती है। दरअसल यही कारण है कि उपभोक्ता को फॉर्म पूरा पढ़ना चाहिए और स्वयं भरना चाहिए।

बीमा उत्पाद को जरूरत के हिसाब से समझें

मालूम हो कि बीमा उत्पाद पारंपरिक, यूलिप, टर्म या मनी बैक 4 तरह के हो सकते हैं। दरअसल इनमें से प्रत्येक उत्पाद के अपने-अपने नफा-नुकसान हैं। जैसे, यदि आप टर्म प्लान लेते हैं तो आपको मैच्योरिटी पर रिटर्न की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

वहीं, यूलिप उत्पाद का रिटर्न बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है। इसलिए उपभोक्ता को अपनी जरूरत को जानते और समझते हुए बीमा उत्पाद खरीदना चाहिए।

बीमा कंपनी को कॉल करें लें स्पष्टीकरण

आपको बता दें कि आजकल सभी बीमा कंपनियों के 24 घंटे वाले टोल फ्री नंबर उपलब्ध हैं। ऐसे में बीमा उत्पाद के बारे में हर तरह के जानकारी के लिए आपको इन नंबरों पर कॉल करें।

इसके अलावा यदि आपको कभी भी ऐसा लगे कि एजेंट आपको कुछ गलत तथ्य बता रहा है, तो बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर पर फोन पर अपने संदेह पर स्पष्टीकरण जरूर ले लें।

उत्पादों की तुलना करें, फिर खरीदें

मालूम हो कि किसी एक कंपनी के उत्पाद को आंख मूंदकर न लें। दरअसल दूसरी कंपनियों के उत्पादों के साथ तुलना कर अपनी जरूरत का उत्पाद खरीदें। बता दें कि आजकल कई बीमा एग्रीगेटर वेबसाइट उपलब्ध हैं, जिन पर सभी उत्पादों के फीचर उपलब्ध हैं। इनसे जानकारी लेकर आप बेहतर व किफायती उत्पाद खरीद सकते हैं।

समझ लें मार्केट लिंक्ड उत्पाद

दरअसल आप यह समझ लें कि आपकी पॉलिसी मार्केट से किस तरह जुड़ी है। जी हां, अब यदि आप बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर ही रहना चाहते हैं तो यूलिप प्लान लेने से बचें। लेकिन यदि आप इसमें निवेश करते हैं तो डेट और कैंश फंड को चुने इन पर कम लेकिन अच्छा रिटर्न मिलता है।

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