Loading...

नीति / महाभारत में बताए गए हैं जिंदगी के सबसे बड़े पांच सुख, जानिए

0 720

महाभारत में विदुर ने कई सारी नीतियों के बारे में बताया है। यह नीतियां ना सिर्फ उस समय कारगर साबित होती थी। बल्कि आज भी हर इंसान के जीवन में काफी ज्यादा महत्व रखती है। अगर हम इन नीतियों पर ध्यान रखें और जीवन में अपनाना शुरू कर दें तो हम भी अपने जीवन की सारी परेशानियों से निजात पा सकते हैं।

महाभारत में परमात्मा विदुर का यह श्लोक

आरोग्या मानृण्यमविप्रवासः सद्धिर्म नुष्यैः सह स्मप्रयोगः।

स्वप्रत्यया वृत्तिरभीतवासः षड् जीवनलोकस्य सुखानि राजन्।।

Loading...

महात्मा विदुर के श्लोक का मतलब है कि जो अपना और परिवार का जीवन यापन करने के लिए खूब धन कमाने में काबिल होता है। वह बहुत ही सुखी माना जाता है। कई लोग अपना जीवन चलाने के लिए हमेशा दूसरों पर डिपेंड रहते हैं। ऐसे लोगों का ना तो कुछ स्वाभिमान होता है और ना ही दूसरों की नजर में कोई सम्मान होता है। इसलिए जो अपना जीवन चलाता हो उसे ही सुखी माना गया है।

कहते हैं कि व्यक्ति की जितनी चादर हो उसको उतने ही पैर पसारने चाहिए। यानी कि मनुष्य को हमेशा अपनी इनकम के अनुसार ही अपेक्षाएं रखनी चाहिए। कई बार हम सभी अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरों से पैसे उधार मांग लेते हैं। उस कर्ज को चुका नहीं पाते हैं। ऐसा करके वह लोग अपने परिवार को भी परेशानी में डाल देते हैं।

कई कारणों के चलते लोग अपना देश छोड़कर विदेश में जाकर धन कमाने लग जाते हैं. ऐसा करने का कारण चाहे जो भी हो लेकिन देश में रहने का सुख दुख होता है। वह एक अलग ही होता है इसके अलावा अपने देश छोड़कर दूसरे देश में रहने वाले लोगों को दोष लगता है। जो मनुष्य अपना पूरा जीवन काल अपने देश में बताता है वह काफी ज्यादा सुखी माना जाता है।

एक व्यक्ति का हमेशा स्वस्थ रहना किसी वरदान से कम नहीं होता। जो मनुष्य हमेशा बीमारियों की गिरफ्त में रहता है। उसको अपने जीवन में कई सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिसके कारण मनुष्य कोई भी काम तरीके से ठीक ढंग से नहीं कर पाता है। इसके साथ ही मनुष्य को अपनी सेहत के साथ-साथ पैसे का भी नुकसान उठाना पड़ता है।

जिसकी अपने से ज्यादा ताकतवर इंसान के साथ दुश्मनी होती है। वह पूरा समय बस उसी दुश्मनी के बारे में सोचता रहता है। इस कारण वह अपने जीवन का आनंद नहीं ले पाता है। डर और चिंता के कारण अक्सर मनुष्य के काम भी प्रभावित होते हैं। जिसके कारण उसका कोई भी काम ठीक तरीके से नहीं हो पाता है।

कहते हैं इंसान की जैसी संगति होती है। वैसा ही उसका खुद का नेचर होता है। लेकिन अगर इंसान बुरी संगति में पड़ जाए तो उसका परिणाम काफी ज्यादा बुरा होता है। इसलिए हमेशा हम सभी को अच्छी संगति में लेना चाहिए। इससे हमको तो फायदा होता ही है बल्कि हमारे परिवार वालों को भी किसी प्रकार का डर नहीं होता है।

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.