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मोदी सरकार की योजना, जीरो बजट खेती से दोगुनी होगी किसानों की आय

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अगर आपने इस बार के आम बजट पर गौर किया हो तो अपने यह जरूर नोटिस किया होगा कि साल 2019-20 के बजट में जिस शब्द की सबसे ज्यादा चर्चा है वो है जीरो बजट खेती। जीरो बजट या शून्य लागत खेती। दरअसल बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार जीरो बजट खेती को बढ़ावा देगी।

जानिए आखिर क्या है जीरो बजट खेती

आपको बता दें कि जीरो बजट खेती के तहत खेती के लिए जरूरी बीज, खाद-पानी आदि का इंतजाम प्राकृतिक रूप से ही किया जाता है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसके लिए मेहनत जरूर अधिक लगती है, लेकिन खेती की लागत बहुत कम आती है और कीमत अधिक मिलती है।

मालूम हो कि जीरो बजट खेती में लागत बहुत कम हो जाती है, इसलिए किसानों को फसल को उगाने के लिए कर्ज लेने की जरूरत नहीं होगी और किसान कर्ज के जाल में नहीं आएंगे। बता दें कि इसमें केमिकल कीटनाशक और उर्वरकों का इस्तेमाल नहीं होता है।

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दरअसल जीरो बजट खेती का लक्ष्य लोन पर निर्भरता कम करना और लागत घटाना है। आपको बता दें कि फिलहाल कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में इस पर प्रयोग चल रहा है।

किसानों को मिलेगी मदद

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इससे करोड़ों किसानों को अपनी लागत में कमी लाने और टिकाऊ खेती करने में मदद मिलेगी। जी हां, दरअसल ऐसा माना जा रहा है कि इस कदम से ग्रामीण संकट को बहुत हद तक कम करने में मदद मिलेगी। बता दें कि इसके लिए किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

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