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महाभारत: जो लोग दूसरों को कष्ट देते हैं और फिर पूजा पाठ करते हैं तो उन्हें कोई शुभ फल नहीं मिलता

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वेदव्यास के द्वारा लिखी गई महाभारत ग्रंथ में पांडव और कौरवों की कथा के माध्यम से इस बात को बताया गया है। कि हमें कौन-कौन से काम करने चाहिए और हमें अपने जीवन में किन किन कामों को करने से बचना चाहिए। महाभारत के आदि पर्व के अनुसार, अगर हम गलत नियम के साथ अच्छे काम करते हैं। तो उनका शुभ फल भी हम को नहीं मिलता है। हमको कई सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आपको बता दें आदि पर्व में लिखा है कि

तपो न कल्को$ध्ययनं न कल्क: स्वाभाविको वेदविधिर्न कल्क:।

प्रसह्य वित्ताहरणं न कल्क-स्तान्येव भावोपहतानि कल्क:।।

यानी कि इस श्रलोक का मतलब है कि भगवान के लिए की गई तपस्या फलदायक होती है। शास्त्रों के अध्ययन में भी शुभ फल मिलते हैं। और कड़ी मेहनत करके प्राप्त किया गया धन भी शुभ माना जाता है। यह सभी शुभ कर्म दूसरों को कष्ट देने की नीयत से किए जाते हैं तो इसका बुरा फल देते हैं। जैसे किसी का अहित करने के लिए पूजा पाठ की जाए तपस्या की जाए। तो इसका हमको कोई फल नहीं मिलता है। यानी कि अगर हम दूसरे को नुकसान पहुंचाने के लिए किसी भी तरह की पूजा पाठ करते हैं या फिर मंत्रों का जाप करते हैं। तो हमेशा किसी भी तरीके से शुभ फल नहीं मिलता है। बल्कि इसके चलते हम काफी सारी परेशानियों से भी घिर जाते हैं। इसलिए हमें अपने एक अच्छे जीवन की प्राप्ति के लिए इन सब कामों से बचना चाहिए। कभी भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए। जिससे दूसरे को परेशानी हो क्योंकि ऐसा करके ही हम अपने जीवन में सुखी रह पाएंगे।

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