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चीन के भिखारी भी हुए डिजिटल, QR कोड के जरिए मांगते हैं भीख

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भारत में पिछले कुछ सालों में डिजिटल इंडिया बनाने के लिए काफी कवायद चल रही है। लेकिन इस मामले में हमारा पड़ोसी देश चीन हमसे बहुत आगे है। आप इस बात का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि चीन में भिखारी भी डिजिटल कैशलेस हो चुके हैं। भीख मांगने के दौरान जो लोग खुले पैसे ना होने का बहाना करते हैं, वह लोग क्यूआर कोड का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि यह बात काफी चौंकाने वाली है।

मीडिया की खबरों के मुताबिक, भिखारी चीन में भीख मांगने के लिए मोबाइल पेमेंट जैसी डिजिटल सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। आपको चीन के सार्वजनिक स्थानों और पर्यटन स्थलों पर भीख मांगते हुए भिखारी दिख जाएंगे। इन भिखारियों को कैशलेस भीख देने का चलन बढ़ने के बाद एक ग्रे बिजनेस शुरू हो गया है। कुछ भिखारी अपना स्टार्टअप भी शुरू कर चुके हैं। जब भी कोई व्यक्ति किसी भिखारी को कैशलेस पेमेंट के जरिए भीख देता है तो भिखारी के पास भी भीख देने वाले का डाटा पहुंच जाता है और इन सभी भिखारियों द्वारा जमा किया गया यह डाटा अंत में कंपाइल पर बाजार में बेचा जाता है।

हर स्कैन के जरिए 7 से 15 हजार कमा रहे हैं भिखारी

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फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक, भिखारी हरीश के जरिए हर स्कैन के जरिए 7 से 15 हजार रुपये तक कमा लेते हैं। इस वजह से उन्हें छोटे से बिजनेस को प्रमोट करने में मदद मिल रही है। बता दें कि क्यूआर कोड सिस्टम 1994 में जापान की कंपनी डेंसो वेव द्वारा विकसित किया गया था। इसका मकसद मैन्युफैक्चर किए गए वाहनों को ट्रैक करना था। लेकिन धीरे-धीरे यह दक्षिण कोरिया और जापान में ऑनलाइन पेमेंट के लिए उपयोग किया जाने लगा। किसी ने नहीं सोचा था कि चीन में भिखारी इस पेमेंट सिस्टम को इतना सफल बना देंगे।

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