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2025 तक जापान को पछाड़कर भारत बन जाएगा तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

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अगर आप अर्थव्यवस्था की रिपोर्ट्स पर नजर रखते हैं तो आपको पता ही होगा कि इस साल भारत ब्रिटेन को पीछे करके दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा लेकिन अब एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में भारत जापान को पछाड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का तमगा हासिल कर लेगा।

जी हां, दरअसल यह दावा किया है लंदन स्थित ग्लोबल इंफॉर्मेशन कंपनी IHS Markit ने। आपको बता दें कि कंपनी ने एक रिपोर्ट पेश की है, जिसमें यह पूर्वानुमान लगाया गया है कि साल 2025 तक भारतीय अर्थव्यवस्था 5.9 लाख करोड़ डॉलर की होगी।

यही नहीं, इसके साथ ही रिपोर्ट में भारतीय उपभोक्ता बाजार के 1.9 लाख करोड़ डॉलर से बढ़कर 3.6 लाख करोड़ डॉलर के होने का अनुमान लगाया गया है। बता दें कि इस रिपोर्ट के मुताबिक 2019-2023 के दौरान देश की अर्थव्यवस्था तकरीबन 7% सालाना की दर से बढ़ेगी।

ग्लोबल जीडीपी में अधिक योगदान देगा भारत

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मालूम हो कि इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत जिस गति से दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो रहा है उस हिसाब से यह कहना उचित होगा कि ग्लोबल जीडीपी को बढ़ाने में भारत का योगदान भी पहले से और अधिक बढ़ेगा।

दरअसल जैसे-जैसे देश का कंज्यूमर मार्केट बढ़ता जाएगा वैसे-वैसे भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र के आर्थिक विकास के प्रमुख इंजनों में से एक बन जाएगा। बता दें कि इससे एशिया में क्षेत्रीय व्यापार और निवेश को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

निवेश, बचत और निर्यात का क्रम बरकरार रखना होगा

दरअसल इस रिपोर्ट में कहा गया है कि, इन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए भारत ने जो आर्थिक रोडमैप तैयार किया है, उसमें निवेश, बचत और निर्यात का क्रम बनाए रखना होगा। ऐसा करके ही अगले 5 साल में देश रफ्तार से आर्थिक तरक्की कर सकेगा।

मालूम हो कि इस रिपोर्ट के अनुसार, इनोवेशन, उत्पादकता में तेज वृद्धि और नई तकनीक को लागू करने में निवेश अहम भूमिका निभाता है और नौकरियों के अधिक अवसर पैदा करता है। दरअसल यही वजह है कि देश के हालिया इकोनॉमिक सर्वे में निजी निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार करने की जरूरत पर फोकस किया गया है।

स्टार्टअप को बढ़ावा देने पर हो जोर

आपको बता दें कि इस रिपोर्ट के मुताबिक नए स्टार्टअप के डेवलपमेंट को रफ्तार देकर और नई यूनिकॉर्न कंपनियां खड़ी करके बेहतर नौकरियों के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। दरअसल ट्रांसपोर्ट और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टरों में तेज बुनियादी विकास प्राथमिकता होना चाहिए। यही नहीं, इसके साथ ही सरकार को लालफीताशाही का दबाव भी कम करना होगा।

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