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450 रुपए की कम कीमत वाला हेलमेट नहीं है बिल्कुल सुरक्षित, मार्केट में मौजूद हैं 80% नकली हेलमेट

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ये तो हम सब जानते हैं कि भारत में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की एक बड़ी वजह नकली हेलमेट भी है। दरअसल स्टीलबर्ड हेलमेट कंपनी के एमडी राजीव कपूर के मुताबिक मार्केट में करीब 80% नकली हेलमेट मौजूद है।

बता दें कि उन्होंने नकली हेलमेट की पहचान का सरल तरीका बताते हुए कहा कि 450 रुपए से कम में खरीदा गया हेलमेट नकली होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत सरकार के सेफ्टी नॉर्म्स के तहत बनाए जाने वाले एक आईएसआई प्रमाणित हेलमेट पर कम से कम 450 रुपए की लागत आती है।

जीएसटी घटाने की है मांग

दरअसल कपूर ने बताया कि एक हेलमेट बनाने में करीब 250 का कच्चा माल लगता है, इसमें 50 रुपए फैक्ट्री और लैब चार्ज, 15 रुपए लेबर चार्ज, डिस्ट्रीब्यूशन का प्रॉफिट शामिल है। यही नहीं, इसके अलावा 18% की दर से जीएसटी लगाई जाती है। इतनी लागत के बाद 450 रुपए में हेलमेट बेचना संभव नहीं है।

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दरअसल कपूर ने नकली हेलमेट की मैन्युफैक्चरिंग रोकने की मांग की है और साथ ही आईएसआई हेलमेट की बिक्री ज्यादा हो, इसके लिए हेलमेट पर लगाई जाने वाली 18% की जीएसटी को घटाकर 5% करने की मांग की है।

दरअसल इससे आम ग्राहकों को सस्ता हेलमेट मिल सकेगा और सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में कमी लाई जा सकेगी। इसके साथ ही मोटर व्हीकल बिल को सरकार से लागू कराने की मांग पर जोर दिया है।

बता दें कि कपूर के अनुसार भारत सरकार जीडीपी का 3% सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और उनके इलाज पर खर्च कर देती है। दरअसल ऐसे में सरकार का सड़क सुरक्षा के नियमों को सख्त बनाना चाहिए।

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