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करतारपुर के बहाने पाकिस्तान कर रहा है भारत में अशांति फैलाने की साजिश

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भारत और पड़ोसी देश पाकिस्‍तान के बीच करतारपुर कॉरीडोर पर कामकाज तेजी से जारी है। जी हां, दरअसल दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर 14 जुलाई को फिर से वार्ता होने वाली है, जिसमें कुछ अहम मुद्दों के सुलझने के आसार हैं।

आपको बता दें कि इसे नवंबर 2019 में गुरुनानक देव की 550वीं जयंती पर खोलने का लक्ष्‍य निर्धारित किया गया है और दोनों देशों की सरकारों का दावा है कि वे अपने-अपने हिस्‍से में आने वाले क्षेत्रों में इस दिशा में तेजी से कामकाज में जुटे हैं।

लेकिन इस बीच विशेषज्ञों ने पाकिस्‍तान की नीयत को लेकर चेताया है। जी हां, दरअसल उनका कहना है कि पाकिस्‍तान करतार कॉरीडोर का इस्‍तेमाल भारत के पंजाब में शांति भंग करने और खालिस्‍तानियों को एक बार फिर बढ़ावा देने के लिए कर सकता है।

आपको बता दें कि विशेषज्ञों की यह चेतावनी ऐसे समय में सामने आई है, जबकि रिसर्च एंड एन‍ालिसिस विंग यानी कि रॉ के एक पूर्व सीनियर अफसर ने हाल ही में चेताया था कि अगर पाकिस्‍तान अपनी नीतियों में बदलाव करता है तब भी आतंकवाद इसकी विदेश नीति का हिस्‍सा बना रहेगा।

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बता दें कि रॉ के पूर्व वरिष्‍ठ अधिकारी आनंद अर्नी ने एक लेख में साफ कहा था कि फिलहाल पाकिस्‍तान की नीतियों में बदलाव की उम्‍मीद न के बराबर है और वह अपनी विदेश नीति के तौर पर आतंकवाद का इस्‍तेमाल करता रहेगा। दरअसल अब विशेषज्ञों ने करतारपुर कॉरीडोर को लेकर पाकिस्‍तान की नीयत व मंशा पर सवाल उठाए हैं।

मालूम हो कि समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, इंस्‍टीट्यूट फॉर कन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट के एग्‍जक्‍यूटिव डायरेक्‍टर अजय साहनी ने कहा है कि पाकिस्‍तान को सिखों की धार्मिक भावनाओं से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि इसके जरिये वह अपने एजेंडा को अमली जामा पहनाने की फिराक में है।

दरअसल उन्होंने कहा है कि इस कॉरीडोर के जरिये पाकिस्‍तान से भी कुछ लोग भारत जाएंगे, जो वहां अपने एजेंडे को पूरा करने के लिए कुछ लोगों की भर्ती करेंगे या उन्‍हें लामबंद करेंगे। इसके अलावा उन्‍होंने पाकिस्‍तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई पर भारत के खिलाफ लगातार साजिश करने का आरोप भी लगाया।

वहीं दूसरी तरफ पंजाब से कांग्रेस के प्रवक्‍ता राज कुमार वर्का ने भी कहा कि पाकिस्‍तान करतारपुर कॉरीडोर का लाभ उठाकर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने की फिराक में है, पर उसकी मंशा कभी कामयाब नहीं होगी।

आपको बता दें कि मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह पहले ही पाकिस्‍तान को इस संबंध में आगाह कर चुके हैं। दरअसल विशेषज्ञों की ओर से ये चिंताएं ऐसे समय में व्‍यक्‍त की गई हैं, जबकि भारत भी इस मुद्दे पर पाकिस्‍तान के समक्ष अपनी बात रख चुका है। मालूम हो कि भारत ने एक प्रमुख खालिस्‍तानी अलगाववादी की पाकिस्‍तान में मौजूदगी को लेकर भी उससे स्पष्टीकरण भी मांगा है।

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