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सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए सरकार अब टायरों में नाइट्रोजन गैस भरना कर सकती है अनिवार्य

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भारत में सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने आज राज्यसभा में कहा कि दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाएं हैं।

उन्होंने आगे कहा कि नए राजमार्ग सीमेंट और कंक्रीट से बनाए जा रहे हैं जिसके कारण टायर जल्दी गर्म होते हैं और फट जाते हैं। इससे निपटने के लिए टायरों में नाइट्रोजन गैस भरने पर विचार किया जा रहा है। इससे दुर्घटनाओं में कमी आएगी।

क्या हैं इसके फायदे

आपको बता दें कि नाइट्रोजन गैस टायर को गर्मियों में ठंडा रखती है। नाइट्रोजन गैस रबर की वजह से टायर में कम बढ़ पाती है, जिसकी वजह से टायर में प्रेशर ठीक रहता है। इसलिए फॉर्मूला वन रेसिंग कारों के टायर्स में नाइट्रोजन गैस ही भरी जाती है।

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बता दें कि साधारण हवा फ्री में या फिर ज्यादा से ज्यादा 5 से 10 रुपए में भर जाती है, जबकि नाइट्रोजन गैस के लिए 150 से 200 रुपए खर्च करने होते हैं।

हर साल होती है सड़क दुर्घटनाओं से 1.50 लाख लोगों की मौत

मालूम हो कि गडकरी के अनुसार देश में प्रतिवर्ष सड़क दुर्घटनाओं में लगभग डेढ़ लाख लोगों की मौत हो जाती है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार इसके प्रति गंभीर है और इन्हें रोकने के लिए नया कानून लाना चाहती है। लेकिन संबंधित विधेयक एक वर्ष से सदन में लंबित है।

यही कारण था कि उन्होंने सदस्यों से इसे जल्दी पारित करने का अनुरोध किया। उन्हाेंने कहा कि दुर्घटनाओं के कई कारण है, जिनमें अप्रशिक्षित चालक, खराब सड़कें और निगरानी का अभाव भी शामिल है।

850 ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर खोलेगी सरकार

आपको बता दें कि केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वाहन चालकों को प्रशिक्षित करने के लिए देश भर में लगभग 850 ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर खोले जा रहे हैं। दरअसल आजकल वाहनों में ऐसी प्रौद्योगिकी लगाई जा रही है, जो चालक के शराब पीने और अधिक माल या सवारी भरने आदि की सूचना स्थानीय पुलिस को दे देगी। यहां आपको बता दें कि ये सब दरअसल वो उपाय हैं जिनसे वाहनों की गति को नियंत्रण में किया जा सके।

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