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आप 1 साल में कितनी बिजली खर्च करते हैं, सरकार की होगी आपके बिल पेमेंट पर नजर

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अभी तक सरकार आपके बैंक खाते पर नजर रखती थी लेकिन अब सरकार आपके बैंक खाते के अलावा विदेश यात्रा और बिजली के बिल पर भी नजर रखेगी. जी हां, अब अगर आपने विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये से अधिक खर्च किए हैं तो आपको आयकर रिटर्न दाखिल करना जरूरी होगा, भले ही आपकी आय 5 लाख या इससे कम हो.

सिर्फ़ यही नहीं, अगर आप बिजली का बिल एक साल में 1 लाख रुपये से ज्यादा भरते हें या एक साल में बेंक खाते में 1 करोड़ या ज्यादा जमा कराया है तो भी रिटर्न दाखिल करना होगा.

टैक्स चोरी रोकने की है ये नई पहल

आपको बता दें कि आम बजट 2019 में टैक्स की चोरी रोकने और टैक्स बेस बढ़ाने के उद्देश्य से यह प्रस्ताव किए गए हैं. दरअसल बजट के साथ प्रस्तुत वित्त विधेयक(2)-2019 में आयकर अधिनियम की धारा-139 में कुछ संशोधन के प्रस्ताव हैं.

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मालूम हो कि इसके तहत कुछ मदों पर किसी भी शख्स के द्वारा एक निश्चित राशि से अधिक का लेनदेन करने पर आयकर रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य होगा.

जी हां, दरअसल इसके अनुसार अगर कोई व्यक्ति एक साल में किसी बैंकिंग कंपनी या सहकारी बैंक में एक या एक से अधिक चालू खाते में कुल 1 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा कराता है तो उसे आयकर विवरण देना अनिवार्य होगा.

इसी प्रकार अगर कोई व्यक्ति खुद की या किसी अन्य व्यक्ति की विदेश यात्रा पर कुल 2 लाख रुपये से अधिक का व्यय करता है तो भी उसे आयकर विवरण देना होगा.

इसी तरह अगर किसी का सालाना बिजली का बिल कुल 1 लाख रुपये से अधिक है तो भी उसे आयकर रिटर्न दाखिल करना होगा.

इसके अलावा आयकर अधिनियम की धारा-54 के तहत लांगटर्म कैपिटल गेन पर टैकस छूट का दावा करने वालों को भी आयकर विवरण देना होगा.

कहां रिटर्न दाखिल करना आवश्यक नहीं

आपको बता दें कि फिलहाल इस समय पूंजीगत लाभ को मकान, बांड जैसी परिसंपत्तियों में निवेश पर आयकर में छूट मिल जाती है और इसके लिए उन्हें आयकर विवरण दाखिल नहीं करना होता है. दरअसल यह सभी संशोधन 1 अप्रैल 2020 से प्रभावी होंगे और आकलन वर्ष 2020-21 और उसके बाद के लिए लागू होंगे.

कैश ट्रांजैक्शन कम करने के लिए है ये प्रस्ताव

मालूम हो कि कैश के लेनदेन को कम करने के लिए आयकर अधिनियम में धारा-194 एन जोड़ने का प्रस्ताव है. इसके तहत बैंक या सहकारी बैंक या डाकघर के खातों से 1 साल में 1 करोड़ से ज्यादा निकासी पर 2 फीसदी की दर से स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) करने की सिफारिश की गई है.

दरअसल यह प्रावधान सरकार, बैंंकिंग कंपनी, बैंंकिंग में लगी सहकारी समिति, डाकघर, बैंंकिंग प्रतिनिधि और व्हाइट लेबल एटीएम परिचालन करने वाली इकाइयों पर लागू नहीं होगा. दरअसल ऐसा इसलिए क्योंकि व्यवसाय के तहत उन्हें भारी मात्रा में नकद धन का इस्तेमाल करना होता है.

आपको बता दें कि बजट दस्तावेजों के अनुसार सरकार भारतीय रिजर्व बैंक से परामर्श कर ऐसी दूसरी फर्मों/व्यक्तियों को भी धारा-194एन के तहत लगने वाले प्रस्तावित टीडीएस से छूट दे सकती है. मालूम हो कि यह संशोधन 1 सितंबर 2019 से प्रभावी करने का प्रस्ताव है.

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