Loading...

एक संत जूते-चप्पल बनाने का काम करते थे, उनसे खुश होकर एक महात्मा ने उन्हें पारस पत्थर दिया, जैसे ही उस पत्थर को लोहे के औजारों पर लगाया वे सोने के हो गए, 1 वर्ष बाद महात्मा

0 1,675

रविदास बहुत ही दयालु संत थे। वे हमेशा अन्य साधु संतों की मदद करते थे। वे लोगों के लिए जूते-चप्पल बनाने का काम भी करते थे। एक बार उनके पास एक महात्मा आए तो रविदास ने उस महात्मा को भोजन करवाया। इतना ही नहीं उन्होंने अपने द्वारा बनाए हुए जूते भी उनको पहनाए।

संत रविदास की निस्वार्थ प्रेम से वह महात्मा काफी ज्यादा खुश हुए। उन्होंने रविदास को एक पारस पत्थर दे दिया। जब उस पारस पत्थर को जैसे ही लोहे के औजारों पर लगाया तो वह औजार भी सोने का बन गया । यह देखकर संत रविदास काफी दुखी हुए और उन्होंने वो पत्थर वापस लौटा दिया। संत रविदास ने पूछा कि अब सोने के औजारों से जूते चप्पल कैसे बनेंगे।

दूसरे संत ने कहा कि तुम इस पारस पत्थर से काफी अमीर हो जाओगे। तुमको अब जूते चप्पल बनाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इतना कहकर उस संत ने वह पारस पत्थर झोपड़ी पर रख दिया और वहां से चल दिए। 1 साल बाद वही संत फिर से रविदास के पास आए तो उन्होंने देखा कि उनकी हालत वैसी की वैसी है।

महात्मा ने रविदास से पूछा कि वह पारस पत्थर कहां है। रविदास ने कहा कि जहां आप रखकर गए थे, वही होगा। रविदास की बातों को सुनकर संत को हैरानी हुई। संत ने रविदास से कहा कि तुम्हारे पास धनवान बनने का कितना अच्छा अवसर था। लेकिन तुमने इसका इस्तेमाल नहीं किया।

Loading...

रविदास ने कहा कि यदि मैं उस पत्थर को ले लेता तो मेरे पास बहुत सारा सोना होता। मैं धनवान होता। लेकिन उसकी रखवाली कौन करता। मैं निर्धनों को दान करके पूरे शहर में प्रसिद्ध हो जाता। मेरे पास भगवान के लिए समय नहीं बचता। मुझे अपने जूते बनाने के काम से बहुत खुशी मिलती है। इससे मेरे खाने-पीने की व्यवस्था हो जाती है। मुझ पर काफी समय बचता है जिससे मैं अपने भगवान की प्रार्थना करता हूं। लेकिन यदि मैं प्रसिद्ध हो जाता तो मेरे जीवन की सुख-शांति खत्म हो जाती। इसलिए मैंने पत्थर को हाथ भी नहीं लगाया।

कहानी की सीख

इस कहानी से हमें सीखने को मिलता है कि यदि व्यक्ति काफी प्रसिद्ध हो जाता है तो उसके जीवन से सुख शांति सब गायब हो जाती है। जो लोग सुख शांति चाहते हैं उनको इस बात का ध्यान रखना चाहिए।

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.