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गांवों में शहरों के मुकाबले ज्यादा तेजी के साथ घट रही है महंगाई, जानिए इसके पीछे का कारण

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महंगाई ने तो सभी को परेशान कर रखा है लेकिन देश में पिछले साल जुलाई से ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी इलाकों की तुलना में महंगाई में गिरावट ज्यादा रही हैं. जी हां, दरअसल संसद में गुरुवार को पेश हुई आर्थिक समीक्षा में कहा गया है. बता दें कि संसद में पेश की गई आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि महंगाई दर के मौजूदा दौर की एक खास बात यह है कि ग्रामीण महंगाई के साथ-साथ शहरी महंगाई में भी कमी देखने को मिली है.

यहां आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगर महंगाई दर बढ़ती है तो बाजार में वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं और लोगों की खरीदने की क्षमता कम हो जाती है. वहीं अगर महंगाई दर घटती है तो बाजार में वस्तुओं के दाम घट जाते और लोगों की खरीदने की क्षमता बढ़ जाती है. दरअसल इसको अर्थशास्त्र में मांग की लोच भी कहा जाता है.

मालूम हो कि महंगाई के बढ़ने और घटने का असर सरकार की नीतियों पर भी पड़ता है. दरअसल आरबीआई भी ब्याज दरों में बदलाव के लिए महंगाई के आधार पर फैसला लेता है.

क्या कहते हैं आंकड़े

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आपको बता दें कि आर्थिक समीक्षा में दरअसल यह बताया गया है कि जुलाई, 2018 से ही शहरी महंगाई की तुलना में ग्रामीण महंगाई में कमी की गति अपेक्षाकृत ज्‍यादा तेज रही है.

दरअसल इसके कारण मुख्‍य महंगाई दर भी घट गई है. बता दें कि इस आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि ग्रामीण मुद्रास्फीति में कमी खाद्य महंगाई के घटने की वजह से आई है.

बता दें कि पिछले 6 माह यानी कि अक्‍टूबर, 2018 – मार्च, 2019 से खाद्य मुद्रास्फीति लगातार नीचे आ रही है. दरअसल इस समीक्षा के मुताबिक एक और खास बात यह है कि ज्यादातर राज्यों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति में गिरावट आई है.

मालूम हो कि वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान 23 राज्‍यों और संघ शासित प्रदेशों में मुद्रास्फीति की दर 4% से नीचे थी. वहीं वित्त वर्ष के दौरानइ 16 राज्‍यों/संघ शासित प्रदेशों में मुद्रास्फीति की दर अखिल भारतीय औसत से कम आंकी गई.

आपको यह भी बता दें कि इस दौरान दमन एवं दीव में मुद्रास्फीति दर न्‍यूनतम रही और इस हिसाब से इसके बाद हिमाचल प्रदेश एवं आंध्र प्रदेश का नंबर आता है.

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