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साल 1860 में इस अंग्रेज ने पेश किया था देश का पहला बजट, कोलकाता में है कब्र

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कल यानी 5 जुलाई को देश का आम बजट पेश होगा। यह मोदी सरकार 2.0 का और नई वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का पहला बजट होगा। हर बार की तरह इस बार की देश का किसान, गरीब एवं मिडिल क्लास उम्मीद भरी निगाहों से इस बजट को देखेगा। लेकिन भारत का पहला बजट कब आया था इस बारे में कम ही लोग जानते होंगे।

जी हां, दरअसल जिस व्यक्ति ने पहली बार देश का आम बजट पेश किया था, वो एक अंग्रेज था। बता दें कि वर्ष 1860 में ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल में सालाना बजट पेश करने की अवधारणा को शुरू किया गया। यह व्यक्ति जन्म से तो अंग्रेज था, लेकिन इसकी कब्र पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के मुलिकबाजार कब्रिस्तान में आज भी मौजूद है।

वित्त सदस्य थे लॉर्ड कैनिंग की काउंसिल में

आपको बता दें कि जेम्स विलसन को भारत में बजट का पितामाह माना जाता है। जी हां, दरअसल दरअसल जेम्स उस समय के वायसराय लॉर्ड कैनिंग की परिषद में वित्त सदस्य थे। इसके अलावा वो इंग्लैंड की संसद में सदस्य, यूके कोषागार के वित्त सचिव व व्यापार बोर्ड में उपाध्यक्ष थे।

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1857 के 2 साल बाद आए थे भारत

जानकारी के लिए बता दें कि वर्ष 1857 में हुए विद्रोह के 2 साल बाद विलसन 28 नवंबर 1859 को भारत आए थे। दरअसल विद्रोह के चलते अंग्रेज सरकार का खजाना पूरी तरह से खाली हो चुका था। सेना पर ज्यादा पैसा खर्च होने की वजह से तत्कालीन ईस्ट इंडिया सरकार पर उधार बढ़ता जा रहा था। बताया जाता है कि उस वक्त के कठिन दौर मे विलसन ने तब सरकार के लिए संकटमोचन की भूमिका निभाई थी।

स्थापित की थी मैगजीन एवं बैंक

आपको बता दें कि विलसन को विश्व की प्रसिद्ध अर्थशास्त्र पर आधारित मैगजीन द इकोनॉमिस्ट और विश्व की प्रसिद्ध बैंकों में शुमार स्टैण्डर्ड चार्टेड बैंक की भी स्थापना की थी। दरअसल विलसन ने सेना के साथ ही साथ सरकार के द्वारा किए जाने वाले खर्चों व कमाई के ब्यौरे को पेश किया था।

पहली बार लागू किया था आयकर कानून

मालूम हो कि विलसन ने ही देश भर में पहली बार आयकर कानून को लागू किया था। हालांकि इस कानून को तब लागू करने के बाद जनता की तरफ से काफी रोष का सामना करना पड़ा था। लेकिन तब विलसन ने कहा था कि ब्रिटिश सरकार भारतीयों को सुरक्षित माहौल व्यापार करने के लिए दे रही है, जिसके एवज में वो बहुत ही कम फीस आयकर के तौर पर ले रही है।

हालांकि आयकर न देने का तिकड़म आज भी लोगों को आता है। दरअसल आजादी के 70 सालों बाद आयकर देने वालों की संख्या में ज्यादा इजाफा नहीं हुआ है। बता दें कि साल 2016 में आयकर से जुड़े एक अधिकारी ने कहा था कि आज भी केवल 24.4 लाख लोग ही आयकर देते हैं, जिनकी सालाना आय 10 लाख रुपये से ज्यादा है। वहीं पिछले 5 सालों में लोग हर साल 25 लाख नई गाड़ियां खरीद रहे हैं, जिसमें 35 हजार लक्जरी गाड़ियां शुमार थीं।

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