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बजट में मोदी सरकार इसलिए किसानों पर होगी मेहरबान, पूरे हो सकते हैं ये वादे

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आगामी 5 जुलाई को देश का आम बजट आने वाला है, ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट से ठीक पहले कृषि में व्यापक सुधार और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए एक हाई पावर कमेटी का गठन किया है. बता दें कि मुख्यमंत्रियों और अधिकारियों वाली यह कमेटी 2 महीने में अपनी रिपोर्ट देगी.

मालूम हो कि महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस इसके कन्वीनर होंगे. कर्नाटक, हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, एमपी, यूपी के सीएम और केंद्रीय कृषि मंत्री इसके सदस्य होंगे.

बता दें कि इससे पहले मोदी सरकार ने अपनी पहली ही कैबिनेट में चुनावी वादा पूरा करते हुए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि स्कीम का 14.5 करोड़ परिवारों तक विस्तार किया और छोटे किसानों के लिए पेंशन की घोषणा की. बजट से पहले ही कैबिनेट ने 14 फसलों की एमएसपी बढ़ा दी है.

(1) इस स्कीम में बढ़ सकता है 2000 रुपये का फायदा

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मालूम हो कि पीएम किसान सम्मान निधि स्कीम की रकम 6000 से बढ़कर 8000 रुपये की जा सकती है. जी हां, दरअसल इसकी वजह ये है कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने अपने एक रिसर्च पेपर में कहा है कि PM-KISAN की रकम अगले 5 साल के लिए बढ़ाकर 6000 रुपये सालाना से 8000 रुपये करना चाहिए. यह मार्केट में फील गुड फैक्टर और उत्साह बढ़ाएगा.

(2) किसानों की इनकम पर हो सकता है बड़ा फैसला

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री ने अप्रैल 2016 में किसानों की आमदनी साल 2022 तक दोगुनी करने का आश्वासन दिया था. दरअसल यह आया सरकार का बड़ा लक्ष्य है. लेकिन अब तक यह नहीं बताया गया है कि आखिर कमेटी के गठन के बाद से अब तक कितनी आय बढ़ गई है.

हाई पावर कमेटी भी इस पर काम कर रही है.

मालूम हो कि नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन यानी कि एनएसएसओ के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2013 में किसानों की औसत मासिक आय 6426 रुपये थी. जबकि खर्च 6223 रुपए था.

बता दें कि कृषि अर्थशास्त्री देविंदर शर्मा के मुताबिक साल 2016 के इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार देश के 17 राज्यों में किसानों की सालाना आय सिर्फ 20 हजार रुपये है.

(3) किसान क्रेडिट कार्ड पर ब्याज मुक्त लोन-

आपको बता दें कि बजट में किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट 3 लाख रुपये से बढ़ाई जा सकती है. अभी इस पर 3 लाख रुपये तक का लोन मिलता है. यही नहीं, साथ ही सरकार केसीसी पर 1 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त कर्ज दे सकती है.

दरअसल बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के लिए बनाए गए अपने संकल्प पत्र में वादा किया था कि उसकी दोबारा सरकार बनी तो 1 से 5 साल तक के लिए 0% ब्याज पर 1 लाख का कृषि कर्ज देगी.

मालूम हो कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के हर किसान पर औसतन 47 हजार रुपये का कर्ज है, जबकि हर किसान पर औसतन 12130 रुपये का कर्ज साहूकारों का है.

(4) कम पानी वाली फसलों पर मिल सकता है प्रोत्साहन

आपको बता दें कि नीति आयोग ने दरअसल यह कहा है कि जल संकट के लिए सबसे ज्यादा धान और गन्ने की फसल भी जिम्मेदार है. दरअसल इन दोनों फसलों में सबसे ज्यादा पानी की खपत होती है. दूसरी ओर जल संकट से पार पाने के लिए सरकार ने अभियान शुरू किया है. ऐसे में बजट में धान और गन्ने की फसल छोड़कर कम पानी वाली फसलों की खेती करने पर प्रोत्साहन मिल सकता है.

मालूम हो कि हरियाणा पहला ऐसा राज्य है जिसने सबसे पहले इस हालात को गंभीरता से लेते हुए धान की खेती को डिस्करेज करने का फैसला लिया. सिर्फड इतना ही नहीं, इसके लिए एक स्कीम भी बनाई गई है. इसके तहत दूसरी फसल पर प्रति एकड़ 2000 रुपये की आर्थिक मदद की जाएगी.

दरअसल केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी के अनुसार हमारी सरकार किसानों की आय दोगुनी से भी ज्यादा करने के लिए काम कर रही है. उनके अनुसार बीजेपी के संकल्प पत्र में हमने किसानों को लेकर जो वादे किए हैं उन्हें हम पूरा करेंगे.

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