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अब बाप-दादा से मिली संपत्ति पर देना पड़ेगा टैक्स, दोबारा लागू हो सकता उत्तराधिकारी कर

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अब उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्तियों, गहनों, शेयर, मियादी जमा राशि, बैंक में जमा रकम (नकदी) पर आगामी बजट में कर यानी कि टैक्स लगाया जा सकता है। जी हां, दरअसल आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस कदम से संसाधनों में वृद्धि नहीं होगी, लेकिन इससे सरकार की गरीब हितैषी नीति का प्रतिपादन होगा।

बता दें कि साथ ही, धनसंचय पर रोक लगेगी और कालाधन के खिलाफ सरकार की मुहिम को प्रोत्साहन मिलेगा। मालूम हो कि दुनिया में यूके इसका एक उदाहरण है जहां उत्तराधिकार कर वसूल किया जाता है।

अर्थव्यवस्था को हो सकता है नुकसान

दरअसल विशेषज्ञों का इस विषय में यह कहना है कि इस कर से सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा, लेकिन वित्त मंत्रालय इसे मजबूत व समावेशी कदम के रूप में पेश कर सकता है। बता दें कि ऐसा इसलिए ताकि अमीर उत्तराधिकार के जरिए ज्यादा संपत्ति हासिल न कर सकें क्योंकि इससे देश में धन के वितरण में गड़बड़ी पैदा होती है।

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मालूम हो कि अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार कर लगाने का यह सही समय है जिससे लोग सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थानों और जन कल्याण के न्यासों को दान देने से बच सकते हैं। सूत्रों की मानें तो यह भी कहा गया कि सरकार उत्तराधिकार में प्राप्त जायदाद और नकदी की संपत्ति पर 35 साल बाद संपत्ति कर दोबारा लागू करने पर विचार कर रही है।

कई देशों में लागू है उत्तराधिकार कर

आपको याद दिला दें कि वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने साल 2005 में 10,000 रुपए से अधिक की नकदी की निकासी पर 0.1% नकदी हस्तांतरण कर लगाया था। बता दें कि इस सीमा को बाद में बढ़ाकर 25 हजार रुपए कर दिया गया था। मालूम हो कि इस मामले में कर संग्रह कम होने के कारण साल 2009 में इसे खत्म कर दिया गया।

बता दें कि कई देशों में उत्तराधिकारियों को अपने पूर्वजों या रिश्तेदारों व मित्रों से प्राप्त जायदाद या संपत्ति पर उत्तराधिकार कर अदा करना पड़ता है। वर्तमान आयकर अधिनियम 1961 में किसी वसीयत के तहत हस्तांतरण या उपहार कर के दायरे में प्राप्त विरासत के हस्तांरण के मामले को स्पष्ट रूप से अलग कर दिया गया है। तदनुसार, भारतीय कानून में उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति पर कर का प्रावधान नहीं है। उत्तराधिकार कर को 1985 में समाप्त कर दिया गया था।

10 करोड़ से अधिक की संपत्ति पर लग सकता है टैक्स

आपको बता दें कि टैक्स के मामलों के विशेषज्ञ वेद जैन के मुताबिक उत्तराधिकार कर को जागीर शुल्क कहा जाता है। दरअसल पिता से उनकी संतान को प्राप्त सभी संपत्तियों में से उनके दायित्व को हटाकर शेष को इसमें शामिल किया जाता है।

दरअसल जैन ने कहा कि प्रतिघात से बचने के मकसद से अगर नया कर लागू किया जाता है तो सरकार 10 करोड़ रुपए से अधिक की उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति पर 5 या 10% कर लगा सकती है। उन्होंने कहा कि यह बड़ी रकम भले ही न हो लेकिन भारत में कितने लोगों के पास 10 करोड़ की संपत्ति है।

बता दें कि उन्होंने आगे कहा कि उत्तराधिकार के लिए बड़ी चुनौती कर अदा करने के लिए नकदी की है। दरअसल अगर किसी के पास एक कंपनी के 50,000 करोड़ रुपए मूल्य के शेयर हैं और अगर आप 5,000 करोड़ रुपए कर चुकाते हैं तो व्यक्ति को कर चुकाने के लिए शेयर बेचने होंगे। दरअसल जैन ने कहा कि 100 करोड़ रुपए की संपत्ति के लिए 10 करोड़ रुपए कर अदा करना होगा।

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