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राजा ने ज्योतिषियों से पूछा एक सवाल, जब कोई नहीं दे पाया जवाब तो राजा साधुओं के पास गया, एक साधु खा रहा था अंगारे, दूसरा खा रहा था अपना ही मांस

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एक दिन एक राजा ने अपने दरबार में बहुत सारे ज्योतिषियों को बुलाया। उन्होंने पूछा कि मेरा जन्म जिस समय में हुआ , उसी समय दूसरे लोगों का भी जन्म हुआ। लेकिन वे राजा नहीं बने। मैं ही राजा क्यों बना। किसी भी ज्योतिषी ने राजा के उत्तर का सवाल नहीं दिया। एक ज्योतिषी ने बताया कि आपको आपके सवाल का उत्तर जंगल में घोर तपस्या कर रहे महात्मा देंगे।

राजा महात्मा से मिलने जंगल में पहुंच ग।ए जब राजा जंगल में पहुंचे तो उन्होंने देखा कि वह महात्मा अंगारे खा रहे हैं। राजा को देखकर बड़ी हैरानी हुई। राजा ने महात्मा से सवाल पूछा तो महात्मा ने कहा मैं भूख से तड़प रहा हूं। तुम आगे पहाड़ी पर जाओ वहां तुम्हें एक और महात्मा मिलेंगे। वह तुम्हारे सवाल का उत्तर देंगे।

राजा आगे पहाड़ी पर पहुंच गए तो उन्होंने देखा कि वह महात्मा चिमटे से नोच नोच कर स्वयं का ही मांस खा रहे हैं। राजा ने उस महात्मा से भी वही प्रश्न किया। अब उस महात्मा ने कहा कि मैं भूखा हूं। इस पहाड़ी के पार एक गांव है, जहां पर एक 5 साल का लड़का रहता है। उसकी कुछ ही देर में मृत्यु होने वाली है। वह तुम्हारे सवाल का उत्तर देगा।

राजा उस बच्चे से मिला। राजा का सवाल सुनकर बच्चे को बहुत हंसी आई और कहा कि मैं कुछ देर जिंदा रहूंगा। इससे पहले तुम्हारे सवाल का उत्तर दूंगा। लड़के ने बताया कि रास्ते में जो तुम्हें 2 महात्मा मिले वो, मैं और तुम पिछले जन्म में भाई थे। जब हम 1 दिन भोजन कर रहे थे तो हमारे पास साधु आए और उन्होंने हम से भोजन मांगा।

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एक भाई ने कहा कि यदि मैंने तुम्हें भोजन दे दिया तो क्या मैं अंगारे खाऊंगा। इसी कारण आज वह अंगारे खा रहा है। दूसरे भाई ने कहा कि यदि मैं तुमको अपना भोजन दे देता हूं तो क्या अपना मांस खाऊंगा। इसी कारण वह दूसरे महात्मा अपना मास नोच कर खा रहे हैं। मैंने उनसे कहा कि यदि मैं तुमको भोजन दे देता हूं तो क्या तो मैं भूखा मर जाऊंगा। इसीलिए मेरी आज यह स्थिति है।

जबकि तुमने दया दिखाकर महात्मा को भोजन दे दिया। इस पुण्य की वजह से ही तुम आज राजा हो। इतना कहकर लड़के की मृत्यु हो गई और राजा को अपने सवाल का उत्तर मिल गया।

कहानी की सीख

इस कहानी से हमें सीखने को मिलता है कि जैसा हम कर्म करते हैं, हमको वैसा फल मिलता है। जो लोग अच्छा काम करते हैं उनको अच्छे फल मिलते हैं और जो लोग बुरा काम करते हैं उनको बुरे फल मिलते हैं। इसीलिए कोई भी बुरा कार्य करने से पहले सौ बार सोचना चाहिए।

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