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अब अगर टोल पर कैश में की पेमेंट तो देना होगा सरचार्ज, जानिए क्यों

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ये तो हम सबने नोटिस किया होगा कि मेट्रो शहरों में टोल प्लाजा पर काफी भीड़ लगती है ऐसे में यहां लगने वाली भीड़ पर काबू करने के लिए सरकार नई योजना बना रही है। जी हां, दरअसल सरकार चाहती है कि टोल पर से गुजरने वाले नकद भुगतान में कमी कर फास्टैग्स के जरिए इलेक्ट्रॉनिक टोलिंग का इस्तेमाल करें। मालूम हो कि कैश टोल कलेक्शन बढ़ने से टोल प्लाजा पर भीड़ बढ़ती है और उसके लिए वहां रुकने वाली गाड़ियों से प्रदूषण बढ़ता है।

दरअसल मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अब इलेक्ट्रॉनिक टोलिंग के बेस रेट तय किए जा सकते हैं और कैश पेमेंट पर भीड़ के हिसाब से सरचार्ज लगाया जा सकता है। बता दें कि मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरचार्ज लोगों को कैश में टोल पेमेंट से रोकने के मकसद से लगाया जाएगा। यह बेस रेट का 10 से 20% तक हो सकता है।

फास्टेग का यह है काम

जानकारी के लिए बता दें कि साल 2014 में शुरू किए गए फास्टेग सिस्टम में RFID टेक्नोलॉजी का यूज किया जाता है। मालूम हो कि फास्टेग एक वाहन की विंडस्क्रीन से जुड़ा हुआ एक उपकरण है। दरअसल यह रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन यानी कि RFID तकनीक पर आधारित है।

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बता दें कि इससे गाड़ी यदि चल भी रही है तो टोल बूथ से गुजरने पर अपने आप ही रिकॉर्ड दर्ज हो जाएगा। दरअसल टोल का किराया सीधे बैंक खाते से काट लिया जाता है जो कि फास्टेग से जुड़ा हुआ है। इसके चलते ड्राइवर को टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ता है। मालूम हो कि NHAI डिजिटल टोल पेमेंट के लिए यूजर्स को डिस्काउंट देता रहा है, जिसे अब पलटा जा सकता है।

ई-टोलिंग को बढ़ावा देना है सकारात्मक कदम

दरअसल एक्सपर्ट्स की मानें तो ई-टोलिंग को बढ़ावा देना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन सरकार को ई-टोलिंग सिस्टम में आ रही तकनीकी दिक्कतें दूर करनी चाहिए। इसके अलावा केंद्र को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि कैश टोल पेमेंट पर लगने वाला सरचार्ज NHAI के खाते में आए।

बता दें कि एक्सपर्ट का यह मानना है हमें ई-टोलिंग की तरफ शिफ्ट होना चाहिए। कम ही मामलों में कैश टोलिंग की इजाजत दी जानी चाहिए। दरअसल इससे सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी और लीकेज नहीं होगा। आपको बता दें कि फिलहाल NHAI के लगभग 400 टोल प्लाजा पर लगभग 30% टोल इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से वसूल किया जा रहा है।

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