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अब सरकारी कर्मचारियों की हर महीने होगी ‘स्क्रीनिंग’, कामचोरों की होगी नौकरी से छुट्टी

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अक्सर ऐसा होता है कि सरकारी कर्मचारी अपनी मनमानी करते हैं लेकिन उनपर कार्यवाही करने वाला कोई नहीं होता है हालांकि अब ऐसा नहीं होगा। जी हां, दरअसल सरकारी कर्मचारियों को अब हर महीने अप्रेजल से गुजरना पड़ सकता है। इसके अलावा केंद्र सरकार अब सभी मंत्रालयों और विभागों से हर महीने ऐसे कर्मचारियों की लिस्ट मांगेगी जिन्हें समय से पहले रिटायर किया जा सकता है।

बता दें कि सरकारी ऑफिसों में कामकाज का माहौल सुधारने और लोगों से जुड़े सरकारी काम का समय से निबटारा करने के लिए सरकार ने कर्मचारियों की जिम्मेदारी सख्ती से लागू करने की बड़ी पहल की है।

जी हां, दरअसल हाल ही में केंद्र की मोदी सरकारी ने भ्रष्ट और निकम्मे कर्मचारियों के सफाए का काम शुरू कर दिया है। इसके चलते जांच एजेंसियों के टॉप अधिकारियों को रिटायर किया गया था। यहां आपको बता दें कि सरकार की यह पहल केंद्रीय ऑफिसों के साथ पब्लिक सेक्टर की इकाइयों और बैंकों के कर्मचारियों पर भी लागू होगी।

15 जुलाई को आएगी सभी मंत्रालय और विभाग कर्मचारियों की पहली लिस्ट

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मालूम हो कि कार्मिक विभाग ने 20 जून को सभी मंत्रालयों और विभागों को पत्र लिखकर कहा है कि काम के मानकों पर खरे ना उतरने वाले कर्मचारियों की लिस्ट हर महीने की 15 तारीख तक जमा कर दें, जिन्हें समय से पहले रिटायर किया जा सके।

बता दें कि इस व्यवस्था को इसी महीने जुलाई से लागू कर दिया गया है। 15 जुलाई को सभी मंत्रालय और विभाग ऐसे कर्मचारियों की पहली लिस्ट जारी करेंगे। मालूम हो कि इस पत्र में कहा गया है कि लिस्ट को पारदर्शी तरीके से तैयार किया जाए।

कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच में लाई जाएगी तेजी, ली जाएगी रिटायर अधिकारियों की मदद

आपको बता दें कि इस पहल पर सरकार का कहना है कि कर्मचारियों के सर्विस रूल में ऐसे प्रवधान पहले से ही हैं। हालांकि अब आम लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए इसे प्रभारी रूप से लागू किया जाएगा।

दरअसल 7वें वेतन आयोग में भी कर्मचारियों की काम करने की क्षमता और जवाबदेही बढ़ाने के कई प्रस्ताव दिए थे। बता दें कि उनमें से यह एक था। दरअसल अगर सूत्रों की मानें तो कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच में तेजी लाने के लिए रिटायर अधिकारियों की मदद ली जाएगी।

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