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LIC के पास लावारिस पड़े हैं 16887 करोड रुपए, कहीं इनमें आपका पैसा तो नहीं, घर बैठे ऐसे करें चेक

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देश की बीमा कंपनियों के पास बीमाधारकों के 16887.66 करोड़ रुपये लावारिस पड़े हैं. जी हां, दरअसल आपको बता दें कि यह आंकड़ा सितंबर 2018 तक का है. आपको बता दें कि भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण यानी कि IRDAI ने बीमा कंपनियों से इस तरह के बीमाधारकों की पहचान करने और उन्हें उनका पैसा लौटाने के निर्देश कई बार जारी किए हैं.

दरअसल हर बीमा कंपनी में पॉलिसीधारक की सुरक्षा के लिए बनायी गई निदेशक स्तरीय समिति को जिम्मेदारी दी गई है कि वह बीमाधारकों के सभी बकायों का समय से भुगतान करे. बता दें कि अगर आपका भी बीमा कंपनी LIC या फिर किसी अन्य के पास पैसा है तो उसके बारे में कैसे पता करें इसकी जानकारी आज हम आपको दे रहे हैं. चलिए जानते हैं इसके बारे में..

किस तरह करें पता

आपको बता दें कि इरडा ने बीमा कंपनियों को अपनी वेबसाइट पर सर्च की सुविधा मुहैया कराने के लिए कहा है. जी हां, दरअसल इसकी मदद से पॉलिसीधारक या आश्रित इस बात का पता लगा सकते हैं कि क्या उनके नाम पर इन कंपनियों के पास कोई बिना दावे वाली रकम तो नहीं है.

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जानकारी के लिए बता दें कि पॉलिसीधारक/लाभार्थी को बिना दावे वाली रकम का पता लगाने के लिए पॉलिसी नंबर, पॉलिसीधारक का पैन, उसका नाम, आधार नंबर जैसे ब्योरे डालने पड़ते हैं. दरअसल बीमा कंपनियों के लिए जरूरी है कि वे अपनी वेबसाइट पर बिना दावे वाली रकम के बारे में बताएं. मालूम हो कि यह जानकारी उन्हें हर 6 महीने में देनी पड़ती है. यहां आपको बता दें कि सभी कंपनियों की वेबसाइट पर ये सुविधा उपलब्ध है. इसके लिए नीचे एलआईसी के लिए दिए गए लिंक को कॉप कर एड्रस बार में पेस्ट करें https://customer.onlinelic.in/LICEPS/portlets/visitor/unclaimedPolicyDues/UnclaimedPolicyDuesController.jpf

किसका कितना पैसा अनक्लेम्ड

मालूम हो कि इंश्योरेंस सेक्टर को लेकर उन्होंने कहा कि सितंबर 2018 के आखिर तक लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर में 16887.66 करोड़ रुपये का अनक्लेम्ड अमाउंट था, जबकि नॉन-लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर में यह अमाउंट 989.62 करोड़ रुपये था।

क्या होता है इस रकम का

आपको बता दें कि जुलाई 2017 में बीमा नियामक इरडा ने एक सर्कुलर जारी किया था. जी हां, दरअसल इसमें सभी बीमा कंपनियों को निर्देश दिए गए थे. मालूम हो कि उनसे 30 सितंबर, 2017 तक 10 साल से ज्यादा की अवधि में पॉलीसीधारकों की दावा नहीं की गई रकम को वरिष्ठ नागिरक कल्याण कोष (एससीडब्लूएफ) में डालने के लिए कहा गया था. बता दें कि यह काम उन्हें एक मार्च, 2018 या उसके पहले तक कर लेना था.

क्यों नहीं होता है दावा

आपको बता दें कि अक्सर इस तरह की इंश्योरेंस पॉलिसी के बारे में नॉमिनी को पता ही नहीं होता है. या फिर पॉलिसी डॉक्यूमेंट नहीं मिलते हैं. दरअसल इस तरह पॉलिसीधारक की मौत होने पर आश्रित इस रकम पर दावा करने की स्थिति में नहीं होते हैं.

बता दें कि ऐसी स्थिति से बचने के लिए नॉमिनी को न केवल पॉलिसी के बारे में पता होना चाहिए, बल्कि उसे यह जानकारी भी होनी चाहिए कि पॉलिसी से जुड़े दस्तावेज कहां रखे हैं. इसके अलावा पॉलिसी में नॉमिनेशन को अपडेट कराना भी नहीं भूलना चाहिए.

ये भी वजह

आपको बता दें कि चेक के पेमेंट के साथ तय समय जुड़ा होता है. दरअसल इसके गलत रखरखाव से भुगतान में देरी हो सकती है. बता दें कि अब ज्यादातर बीमा कंपनियों ने क्लेम के भुगतान के लिए इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था शुरू कर दी है. दरअसल साल 2014 के बाद जारी पॉलिसी में बीमा कंपनियां फंडों के इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर पर जोर देती हैं. बता दें कि इसके लिए वे आवेदन के समय ही ब्लैंक कैंसल्ड चेक ले लेती हैं.

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